गोकना घाट पर कल्पवास को पहुंचने लगे श्रद्धालु

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रायबरेली ब्यूरो धीरेंद्र शुक्ला की
रिपोर्ट

ऊंचाहार, रायबरेली। कल्पवास के लिए निकले श्रद्धालुओं का अलग अलग जत्था गोकर्ण ऋषि की तपोस्थली गोकना घाट पर पहुंचने और बैल गाड़ियों गड़गड़ाहट से कार्तिक पूर्णिमा मेले का शुभारंभ मंगलवार को आगाज़ हो गया। शाम को दीपदान व गंगा आरती करके पूर्व कैबिनेट मंत्री व ऊंचाहार विधायक डा. मनोज कुमार पांडेय इसका शुभारंभ करेंगे। उधर मेला स्थल पर कल्पवास को आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है। इसके पहले सोमवार को ही एसडीएम ने घाट पर लगने वाले मेले से संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कल पांच नवंबर बुधवार को कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर भारी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के साथ पूजा अर्चना करेंगे। इससे ठीक एक दिन पूर्व रात में बैल गाड़ियों की गड़गड़ाहट ने मेले की शुरुआत कर दी। दूसरे जिले अमेठी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ से हजारों श्रद्धालु घाटों पर पहुंचने लगे। परिक्रमा करते हुए कल्पवास के लिए श्रद्धालुओं का अलग अलग जत्था घाट पर पहुंचने लगा। एसडीएम राजेश श्रीवास्तव ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को मेला क्षेत्र में व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। घाट पर नदी में पर्याप्त दूरी तक बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है। इन पर झंडा लगाने का कार्य किया जायेगा। बैरिकेडिंग के दूसरी ओर
दीपदान और गंगा आरती के साथ मंगलवार की शाम को होगा मेले का शुभारंभ, सफाई के साथ सुरक्षा का रखा जाएगा ध्यान
नाव रहेगी। जिन पर गोताखोर तैनात रहेंगे। सुरक्षा की की दृष्टि दृष्टि से ड्रोन से निगरानी की जाएगी। सीओ गिरजा शंकर त्रिपाठी ने बताया कि मेले में भारी पुलिस बल के साथ एलआइयू व सादी वर्दी में भी पुलिस सक्रिय की गई है। मेला सीसी कैमरे की निगरानी में होगा। घाट के तीर्थ पुरोहित पंडित जितेंद्र द्विवेदी ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान दीपदान और नौका विहार का आनंद लेने पहुंचेंगे। मेला लगभग तीन किलोमीटर की परिधि में रहेगा। जिसे आठ सेक्टरों में विभाजित किया गया है। मुख्य मार्ग से दोनों और चार-चार सेक्टर रहेंगे, दुकान लगाने के लिए अलग से जगह निर्धारित की गई है। मेले के मुख्य द्वार से किसी भी वाहन का प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
इस मेले को लेकर जहां झूले और तरह तरह गृहस्थी और अलग अलग किस्म की दुकानें लगी हैं वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय लोगों में मेले को लेकर उत्साह है।

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