ईंट भट्ठा उद्योग पर तुगलकी फरमान, संघ ने सौंपा ज्ञापन

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राज्य सरकार से की सर्वे आदेश वापस लेने की मांग

ककोर में एडीएम को सौंपा ज्ञापन
जिला ब्यूरो चीफ अनिल अवस्थी
औरैया। प्रदेश भर के ईंट भट्ठा संचालकों में आयुक्त राज्यकर विभाग के आदेश को लेकर भारी आक्रोश है। जनपद ईंट निर्माता समिति, औरैया (सम्बद्ध उ.प्र. ईंट निर्माता समिति) ने इस आदेश को नियम विरुद्ध बताते हुए इसके विरोध में ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को सौंपा है।
सोमवार को समिति के अध्यक्ष रवीन्द्र सिंह कुशवाह, कोषाध्यक्ष चन्द्र मोहन चोपड़ा व महामंत्री हरिश्चन्द्र वर्मा ने राज्यकर मंत्री, उत्तर प्रदेश शासन को जिलाधिकारी औरैया के माध्यम से ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में कहा गया है कि 13 अक्टूबर को जारी आदेश के तहत ईंट भट्टों का प्रति माह सर्वे कराया जाना प्रस्तावित है जबकि जीएसटी अधिनियम 2017 की धारा 71 के अनुसार यह अधिकार संयुक्त आयुक्त से नीचे के अधिकारियों को नहीं है। समिति ने चेतावनी दी कि यह आदेश न केवल नियमों के विपरीत है, बल्कि इससे विभागीय उगाही को बढ़ावा मिलेगा। ज्ञापन में कहा गया है कि ईंट भट्टा उद्योग पूरी तरह ग्रामीण व श्रमिक आधारित कुटीर उद्योग है। भट्टों पर कार्य करने वाले मुनीम या कर्मी अधिक शिक्षित नहीं होते जिससे रिकॉर्ड या दस्तावेज़ों की सही जानकारी सर्वे के दौरान उपलब्ध नहीं हो पाएगी। इससे अनावश्यक उत्पीड़न की संभावना बढ़ जाएगी। समिति ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियाँ इस उद्योग के प्रति सौतेला व्यवहार दर्शा रही हैं। जहां अन्य वस्तुओं पर जीएसटी दरें घटाई गईं वहीं लाल ईंट पर दर 12 प्रतिशत ही रखी गई। कोयले पर जीएसटी 5 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दी गई, जिससे लागत में वृद्धि हुई है। समिति ने मांग की है कि सरकार इस तुगलकी फरमान को तत्काल रद्द करे और ईंट उद्योग को अन्य व्यापारों की भांति समान अवसर व राहत प्रदान करे। ज्ञापन देने वालों में अनिल गुप्ता, सत्यनारायण गुप्ता, कन्हैयालाल गुप्ता, नीरज राजपूत, अरुण दुबे, प्रेमकांत अवस्थी, प्रशांत पोरवाल, अनुज अग्रवाल, अजय भदोरिया, केसरवानी, चिराग दुबे, गुड्डू सेंगर सहित अन्य लोग मौजूद रहें।

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