अलीगढ़ की किशोरी के लिए के.डी. हॉस्पिटल के चिकित्सक बने भगवान

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सर्जरी के माध्यम से भोजन करने में असमर्थ बुशरा की आहार नली बनाई
डॉ. मुकुंद मूंदड़ा और उनकी टीम को सर्जरी में लगे लगभग नौ घंटे
मथुरा। के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के विशेषज्ञ गैस्ट्रो सर्जन डॉ. मुकुंद मूंदड़ा और उनकी टीम गांव चंडौस, तहसील गभाना, जिला अलीगढ़ निवासी किशोरी बुशरा (18) पुत्री इलियास के लिए भगवान साबित हुई। चिकित्सकों ने लगभग नौ घंटे के अथक प्रयासों के बाद सर्जरी के माध्यम से पिछले आठ महीने से भोजन करने में असमर्थ बुशरा को नई आहार नली बनाकर नवजीवन दिया है। अब बुशरा पूरी तरह से स्वस्थ है तथा सामान्य तरीके से भोजन करने लगी है। उसका वजन भी बढ़ने लगा है।
जानकारी के अनुसार लगभग आठ महीने पहले चंडौस, तहसील गभाना, जिला अलीगढ़ निवासी बुशरा पुत्री इलियास ने आंखों से न दिखाई देने के चलते एसिड पी लिया था। एसिड के चलते उसकी आहार नली सिकुड़ गई थी तथा वह कुछ भी खाने-पीने में असमर्थ हो गई। किशोरी का जीवन बचाने उसे अस्थायी नली से भोजन दिया जा रहा था। बुशरा की परेशानी को देखते हुए परिजन उसे अलीगढ़ के साथ आगरा के चिकित्सालयों में भी ले गए लेकिन चूंकि आहार नली का ऊपरी हिस्सा ही सिकुड़ गया था लिहाजा हर चिकित्सक ने सर्जरी करने से मना कर दिया। आखिरकार लोगों की सलाह पर किशोरी को 11 नवम्बर, 2025 को के.डी. हॉस्पिटल लाया गया।
विशेषज्ञ गैस्ट्रो सर्जन डॉ. मुकुंद मूंदड़ा ने पुराने पर्चे और जांच रिपोर्ट देखने के बाद किशोरी बुशरा का रंगीन एक्सरे तथा एंडोस्कोपी कराई, जिससे पता चला कि एसिड की वजह से उसकी आहार नली ऊपर से नीचे तक सिकुड़ गई है। डॉ. मूंदड़ा ने परिजनों को सर्जरी की सलाह दी। परिजनों की स्वीकृति के बाद 12 नवम्बर को डॉ. मूंदड़ा और उनकी टीम द्वारा किशोरी की आंतों को आठ जगह से काटकर नई आहार नली (इसोफेगस) बनाई गई। बेहद जोखिम भरी इस सर्जरी में चिकित्सकों को लगभग नौ घंटे का समय लगा। सर्जरी पूरी तरह सफल रही। डॉ. मूंदड़ा ने बताया कि इस सर्जरी की सबसे बड़ी चुनौती आहार नली के पास स्थित वायस बाक्स को सुरक्षित रखना था। इस मुश्किल सर्जरी में डॉ. मुकुंद मूंदड़ा का सहयोग डॉ. यतीश, डॉ. अपूर्वा, निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. निशांत, डॉ. शिवांगी अग्रवाल, टेक्नीशियन शिवम और नीरज ने किया।
12 नवम्बर को सर्जरी के बाद किशोरी बुशरा को 15 दिनों तक चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया। जब उसने स्वयं से भोजन करना शुरू कर दिया, तब उसे छुट्टी दे दी गई। चिकित्सक नियमित तौर पर फोन या फालोअप के लिए के.डी. हॉस्पिटल बुलाकर उसके स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं। डॉ. मूंदड़ा ने बताया कि के.डी. हॉस्पिटल में सर्जरी के माध्यम से आहार नली बनाने का यह 12वां सफल केस है। उन्होंने बताया कि बुशरा की सर्जरी दिल्ली के मुकाबले के.डी. हॉस्पिटल में 10 गुना कम पैसे में हुई है। किशोरी के पूरी तरह से स्वस्थ होने पर परिजनों ने चिकित्सकों का आभार माना है।
के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर के चेयरमैन मनोज अग्रवाल, डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गगन दीप सिंह ने सफल सर्जरी के लिए डॉ. मुकुंद मूंदड़ा और उनकी टीम को बधाई देते हुए किशोरी बुशरा के स्वस्थ, सुखद जीवन की कामना की है।

चित्र कैप्शनः बुशरा और उसकी सर्जरी करने वाली के.डी. हॉस्पिटल के चिकित्सकों की टीम।

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