बजट 2026: इनकम टैक्स संरचना में किसी भी प्रकार के बदलाव की घोषणा न होने से बाजार में निराशा

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नई दिल्ली । केंद्रीय बजट के ऐलान के बाद देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर शेयर बाजार में देखने को मिला। निवेशकों को जहां आयकर स्लैब में राहत और मध्यम वर्ग को टैक्स में छूट की उम्मीद थी, वहीं इनकम टैक्स संरचना में किसी भी प्रकार के बदलाव की घोषणा न होने से बाजार में निराशा फैल गई। इसी का परिणाम रहा कि शेयर बाजार दिनभर भारी दबाव में रहा और अंततः करीब 2300 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ।

विशेषज्ञों के अनुसार, बजट से पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाएगी या टैक्स स्लैब में राहत देगी, जिससे उपभोग बढ़ेगा और बाजार को सहारा मिलेगा। लेकिन आयकर छूट को लेकर कोई ठोस घोषणा न होने से निवेशकों का भरोसा डगमगा गया।

बजट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में चले गए। बैंकिंग, आईटी, ऑटो और रियल एस्टेट सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया। छोटे निवेशकों में सबसे ज्यादा घबराहट देखने को मिली। इस गिरावट का असर सोने और चांदी पर भी पड़ा।

एमसीएक्स पर  चांदी के भाव में लगभग ₹25,000 प्रति किलो की भारी गिरावट दर्ज की गई। सोने की कीमतों में प्रति 10 ग्राम करीब ₹8,000 की गिरावट आई।

सर्राफा व्यापारियों के अनुसार, वैश्विक संकेतों के साथ-साथ घरेलू बाजार में मांग कमजोर पड़ने से कीमती धातुओं पर दबाव बना। निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश से दूरी बनाते नजर आए। मध्यम वर्ग और वेतनभोगी करदाता बजट से बड़ी राहत की उम्मीद लगाए बैठे थे। खासकर स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने और टैक्स स्लैब में संशोधन की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन सरकार की ओर से ऐसी कोई घोषणा न होने से आम करदाताओं में निराशा साफ दिखाई दी।

व्यापार संगठनों और कर सलाहकारों का कहना है कि टैक्स में राहत मिलती तो खपत बढ़ती और इसका सकारात्मक असर बाजार पर पड़ता, लेकिन राहत न मिलने से उपभोक्ता भावना कमजोर हुई है। कुल मिलाकर माहौल निराशाजनक बजट के बाद बाजार, सर्राफा और आम करदाता—तीनों स्तर पर प्रतिक्रिया लगभग एक जैसी रही।

जहां निवेशकों को प्रोत्साहन नहीं मिला, वहीं आम आदमी को टैक्स में राहत की उम्मीद टूटती नजर आई।

आर्थिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार आगे किसी तरह का स्पष्टीकरण या राहत पैकेज देती है या नहीं। फिलहाल बजट के बाद का माहौल निराशा और असमंजस से भरा हुआ है।

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