रिपोर्ट- आलोक तिवारी
मथुरा। वरिष्ठ पत्रकार राजनीतिक विश्लेषक और विचारक दिनेश पंकज ने जनपद की वर्तमान राजनीतिक स्थिति का विश्लेषण करते हुए कहा है कि मथुरा में भाजपा के विजय रथ को रोकने की क्षमता यदि किसी दल में दिखाई देती है तो वह बहुजन समाज पार्टी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भाजपा से सीधा मुकाबला करने की स्थिति में जिले में प्रभावी नजर नहीं आतीं, जबकि राष्ट्रीय लोकदल की भूमिका भी मजबूत विपक्ष की बजाय भाजपा के सहयात्री जैसी प्रतीत हो रही है।
अपने विश्लेषण के समर्थन में उन्होंने मथुरा-वृंदावन नगर निगम चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों और अपेक्षाकृत कम प्रचार के बावजूद बसपा का “खामोश हाथी” दूसरे स्थान पर रहा था। उनके अनुसार यह परिणाम इस बात का संकेत है कि पार्टी का कोर वोट बैंक आज भी जिले में मौजूद है और अनुकूल परिस्थितियों में चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
दिनेश पंकज ने पिछले विधानसभा चुनाव के आधार पर बसपा की स्थिति का आकलन करते हुए कहा कि पार्टी भले ही सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी, लेकिन कई विधानसभा क्षेत्रों में उसका मत प्रतिशत निर्णायक स्थिति में रहा। उनके अनुसार बहुकोणीय मुकाबले की स्थिति में बसपा का स्थिर वोट बैंक भाजपा के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है और चुनावी गणित को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा का बूथ स्तर तक मजबूत संगठन उसकी सबसे बड़ी ताकत है, जबकि विपक्ष का बिखराव उसे लगातार लाभ पहुंचा रहा है। ऐसी स्थिति में भाजपा विरोधी मतों का एकजुट होना आवश्यक है, अन्यथा चुनावी परिणामों में बदलाव संभव नहीं होगा।
धर्मनगरी में विकास, स्थानीय समस्याओं और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर उठते रहे सवालों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मजबूत विपक्ष के अभाव में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दे प्रभावी राजनीतिक बहस का रूप नहीं ले पा रहे हैं।
पंकज के इस राजनीतिक विश्लेषण के बाद जिले के सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विभिन्न दलों के नेताओं ने उनके आकलन को गंभीरता से लेते हुए अपने-अपने स्तर पर राजनीतिक स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है। फिलहाल यह बयान मथुरा की राजनीति में विपक्ष की भूमिका और संभावित चुनावी समीकरणों को लेकर नई बहस का कारण बन गया है।





