ऊंचाहार में पर्यावरण पर प्रहार, मनीरामपुर पुल के पास अवैध कटान से सरकार को लाखों का चूना

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रायबरेली ब्यूरो धीरेंद्र शुक्ला की रिपोर्ट

ऊंचाहार (रायबरेली): उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के ऊंचाहार क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के दावों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ताज़ा मामला मनीरामपुर स्थित एनटीपीसी इलाहाबाद ब्रांच क्रॉस रेगुलेटर गेट के पास का है, जहाँ बड़ी संख्या में खड़े हरे-भरे सफेदा (यूकेलिप्टस) के पेड़ों पर बेखौफ आरा चला दिया गया है। इस अवैध कटान से जहाँ एक ओर हरियाली को नुकसान पहुँचा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी राजस्व की बड़ी चोरी का मामला भी सामने आ रहा है।
74 पेड़ों की बलि, 30 लाख का नुकसान
स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मनीरामपुर पुल के पास से लगभग 74 सफेदा के पेड़ों को काट दिया गया है। जानकारों का अनुमान है कि इन पेड़ों की बाज़ारी कीमत लगभग 30 लाख रुपये के आसपास है। इतने बड़े पैमाने पर हुए कटान ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आशंका जताई जा रही है कि यह पूरा खेल मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी तादाद में पेड़ों का कटान हो गया, लेकिन संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह मौन साधे हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध रूप से पेड़ों को काटकर सरकार को सीधे तौर पर ‘चूना’ लगाया गया है। इस मामले में ‘जिलेदार’ की भूमिका को लेकर भी क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं, लेकिन अभी तक किसी भी अधिकारी ने इस पर कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
पर्यावरण के साथ खिलवाड़
एक तरफ सरकार वृक्षारोपण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर ऊंचाहार में फल-फूल रहे इस “लकड़ी माफिया” के आगे प्रशासन नतमस्तक नज़र आ रहा है। मनीरामपुर के ग्रामीण अब मांग कर रहे हैं कि इस अवैध कटान की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए।
पूरे मामले जिलेदार ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है। मामले का पता लगाया जा रहा है।

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