डीएएच पीड़ित किशोरी को के.डी. हॉस्पिटल में मिला नया जीवन

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विशेषज्ञ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शुभम द्विवेदी के प्रयासों से बची गुड़िया की जान


मथुरा। तीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम से पीड़ित किशोरी को के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर की विशेषज्ञ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शुभम द्विवेदी और उनकी टीम के प्रयासों से एक नई जिन्दगी मिली है। एक सितम्बर की रात 10.45 बजे वेंटीलेटर पर लाई गई गुड़िया (14) अब पूरी तरह से स्वस्थ है तथा वह बिना ऑक्सीजन सांस ले रही है। जानकारी के अनुसार दाऊजी, मथुरा निवासी गुड़िया पुत्री कन्हैया के कुछ दिन पहले हाथ-पैरों में दर्द के साथ बुखार आया। परिजनों ने उसे कई चिकित्सालयों में दिखाया, जहां उसका उपचार तो हुआ लेकिन गुड़िया के स्वास्थ्य में सुधार होने की बजाय उसकी प्लेटलेट्स में गिरावट होती गई। प्लेटलेट्स में आई गिरावट के बाद चिकित्सकों ने उसे वेंटीलेटर पर भी रखा लेकिन उसे आराम नहीं मिला। आखिरकार उसे एक सितम्बर की रात 10.45 बजे के.डी. हॉस्पिटल लाया गया।
डॉ. शुभम द्विवेदी (एमडी, इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी) ने गुड़िया के एक्सरों को देखा जिसमें दोनों फेफड़े डैमेज थे तथा तीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम (एआरडीएस) के कारण वायुकोषों (एल्वियोली) में तरल पदार्थ जमा हो गया था। यह तरल पदार्थ रक्तप्रवाह में पर्याप्त ऑक्सीजन जाने से रोक रहा था। तरल पदार्थ का जमाव फेफड़ों में होने की वजह से दिल की धड़कन भी बहुत धीमी चल रही थी। फेफड़ों की कोशिकाओं में खून जमा होने से सांस लेने की क्षमता भी समाप्त हो गई थी। इस नाजुक स्थिति को देखते हुए सामान्य धड़कन लाने के लिए विद्युत तरंगों (कार्डियोवर्जन) का इस्तेमाल किया गया।
डॉ. शुभम द्विवेदी ने गुड़िया के फेफड़ों की दूरबीन विधि से जांच की। उसके कुछ हिस्से की जांच से पता चला कि उसे डीएएच है। बीमारी का सही पता चलने के बाद गुड़िया को तीन दिन तक गहन चिकित्सा इकाई में रखा गया। तीन दिन में ही वेंटीलेटर हटा दिया गया। अब गुड़िया के फेफड़ों ने काम करना शुरू कर दिया है तथा वह स्वतः सांस ले रही है। पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शुभम द्विवेदी ने बताया कि तीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम (एआरडीएस) से पीड़ित मरीजों की रिकवरी देर से होती है। यदि सही समय पर बीमारी की पहचान हो जाए तो इलाज में सहूलियत होती है।
डॉ. शुभम द्विवेदी का कहना है कि फेफड़ों के ठीक से काम न करने और मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने के कारण हुई क्षति से कुछ लोगों को एआरडीएस से उबरने के बाद भी परेशानी हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन थेरेपी एआरडीएस का मुख्य उपचार है। गुड़िया को नया जीवन देने वाली डॉ. शुभम द्विवेदी का सहयोग डॉ. जीतेन्द्र अग्रवाल, डॉ. हर्षिता द्विवेदी, डॉ. गुरुविन्दर बट्टी, डॉ. जोयल अग्रवाल तथा डॉ. रिदम गर्ग ने किया।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के चेयरमैन मनोज अग्रवाल, डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका, चिकित्सा निदेशक डॉ. राजेन्द्र कुमार भारद्वाज तथा विभागाध्यक्ष श्वसन चिकित्सा डॉ. एस.के. बंसल ने गुड़िया को नया जीवन देने के लिए डॉ. शुभम द्विवेदी और उनकी टीम को बधाई दी।

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