संस्कृति विवि की वेबिनार में छात्रों, शिक्षकों के लिए सहकारी अवसरों पर चर्चा

संस्कृति विवि की वेबिनार में छात्रों, शिक्षकों के लिए सहकारी अवसरों पर चर्चा

मथुरा। संस्कृति टेक्नोलॉजी इनक्यूबेशन फाउंडेशन और संस्कृति विश्वविद्यालय के एंटरप्रेन्योरियल क्लब के सहयोग से “प्रारंभिक स्तर के उद्यमियों के सशक्तिकरण-छात्रों और शिक्षकों के लिए सहकारी अवसरों का द्वार खोलना” विषय को लेकर माइक्रोसॉफ्ट टीम्स के माध्यम से नेशनल वेबिनार आयोजित की गई। वेबिनार में विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों के 100 से अधिक छात्रों और संकाय सदस्यों की भागीदारी ने वेबिनार को और महत्वपूर्ण बना दिया।
वेबिनार में भाग ले रहे विषय विशेषज्ञों रितेश डे, कार्यकारी निदेशक, भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई), राजीव शर्मा, कार्यकारी निदेशक, एनसीयूआई, अनंत दुबे, उप निदेशक, एनसीयूआई ने राष्ट्रीय, राज्य, जिला और प्राथमिक स्तर पर सहकारी समितियों की संरचना, सहकारिता के सात सिद्धांत और आंदोलन का नैतिक आधार, सहकारी उद्यमिता को बढ़ावा देने में एनसीयूआई की भूमिका, भारत के सकल घरेलू उत्पाद और ग्रामीण विकास में सहकारी क्षेत्र का योगदान, अमूल, वेरका, सारस्वत बैंक, भुट्टिको, चाय सुट्टा बार, कृभको, इफको, आदि के विषय में विस्तार सहित जानकारी दी। वक्ताओं ने 17वीं भारतीय सहकारी कांग्रेस, राज्य-स्तरीय सहकारी विकास पहलों (जैसे, त्रिपुरा) और सहकारिता मंत्रालय के अंतर्गत सरकारी योजनाओं के बारे में भी उपयोगी जानकारियां दीं।
वेबिनार की शुरुआत बीबीए प्रोग्राम के छात्र और एंटरप्रेन्योरियल क्लब के उपाध्यक्ष पारस गुप्ता के गर्मजोशी भरे स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में उभरते उद्यमियों को सहयोग देने में सहकारी समितियों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड कॉमर्स के डीन, प्रो. (डॉ.) मनीष अग्रवाल ने मुख्य वक्ताओं और प्रतिभागियों का औपचारिक स्वागत करते हुए उद्यमिता शिक्षा में सामाजिक रूप से प्रभावशाली व्यावसायिक मॉडलों को एकीकृत करने के विश्वविद्यालय के उद्देश्य पर ज़ोर दिया।
वेबिनार का आयोजन संस्कृति इंक्युबेशन सेंटर के सीईओ डॉ. गजेंद्र सिंह के निर्देशन में हुआ। वेबिनार में छात्रों और शिक्षकों के लिए साझा अवसरों जैसे सहकारी संस्थानों में इंटर्नशिप और परियोजना कार्य, सफल सहकारी समितियों के अध्ययन दौरे और उद्योग भ्रमण, “द कोऑपरेटर” पत्रिका में योगदान और भारतीय सहकारी समीक्षा (आईसीआर) में शोध पत्र प्रस्तुत करना आदि के बारे में भी बताया गया। वेबिनार के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र भी हुआ। वेबिनार का समापन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड कॉमर्स के सहायक प्रोफेसर और एंटरप्रेन्योरियल क्लब के समन्वयक डॉ. शांतम बब्बर के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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