मथुरा वृन्दावन की यातायात व्यवस्था बदहाल जनता बेहालजाम, जलभराव और टूटी सड़कों ने उजागर की

शासन–प्रशासन की संवेदनहीनता
मथुरा–वृन्दावन, जो भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, आज गंभीर यातायात अव्यवस्था से जूझ रहा है। शहर के प्रमुख चौराहों—गोवर्धन चौराहा, मंडी चौराहा, नारहौली चौराहा, स्टेट बैंक चौराहा, नया बस स्टैंड, भूतेश्वर, डीग गेट, के.आर. कॉलेज के सामने भरतपुर गेट, छटीकरा चौराहा तथा वृन्दावन में पागल बाबा मंदिर के पास तिराहे पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।
स्थिति यह है कि जो दूरी सामान्यतः 10 से 15 मिनट में तय होनी चाहिए, उसे पार करने में लोगों को घंटों लग जाते हैं। इस जाम का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। रिक्शावाले, दुकानदार, नौकरीपेशा लोग, मरीज और तीर्थयात्री—सभी इस अव्यवस्था के शिकार हैं। डीजल और पेट्रोल की बर्बादी के साथ-साथ लोगों को आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
बरसात के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। नया बस स्टैंड के पास पुल के नीचे, भूतेश्वर पुल के नीचे और शहर के कई इलाकों में भारी जलभराव हो जाता है। सड़कों पर पानी भरने से वाहन बंद हो जाते हैं, लोग रास्ते में फँस जाते हैं और व्यापारिक गतिविधियाँ ठप हो जाती हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठते नजर नहीं आते।
इस विषय पर भारतीय पत्रकार सेवा संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष, अखिल भारत वर्षीय ब्राह्मण महासभा के वरिष्ठ जिलाउपाध्यक्ष एवं भगवान परशुराम शोभायात्रा समिति के जिलाउपाध्यक्ष मनोज कुमार शर्मा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मथुरा में महापौर, विधायक, सांसद, राज्यसभा सांसद, एमएलसी से लेकर प्रदेश और केंद्र—हर स्तर पर एक ही राजनीतिक दल की सरकार होने के बावजूद यदि समस्याएँ जस की तस बनी हुई हैं, तो यह बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब जनता अपना कर्तव्य निभाकर वोट दे चुकी है, तो जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं हो रही? केवल फीता काटने, पोस्टर लगाने और भाषण देने से काम नहीं चलेगा। ज़मीनी हकीकत को समझते हुए शासन और प्रशासन को मिलकर यातायात, जलनिकासी और सड़कों की दशा सुधारने के लिए नई और स्थायी योजनाएँ बनानी होंगी।
मनोज शर्मा ने कहा कि मथुरा कोई साधारण शहर नहीं, बल्कि देश–विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यदि यहाँ अव्यवस्था का यही हाल रहा, तो यह प्रदेश और देश दोनों के लिए नकारात्मक संदेश देगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब भी समय है, यदि समाधान नहीं हुआ तो जनता सवाल पूछेगी और ये सवाल पहले से कहीं अधिक तीखे होंगे।
अब चुप रहने का नहीं, जवाब माँगने का समय है।

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