नवतपा-2025 -क्या,क्यों सावधानी- और कैसे :——

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(प0 नरेंद्र चतुर्वेदी (विश्व ज्योतिष रत्न -स्वर्ण पदक ), ध्यान चिकित्सक (ग्रेट हिप्नोथैरेपिस्ट),आध्यात्मिक गुरु, संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष-उपाय ब्राइट डेस्टिनी- दिल्ली -भारत – 91-9811035358.) द्वारा )


पहले जाने की आखिर क्या है “नवतपा”:-
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ज्योतिष के अनुसार प्रत्येक.साल में जब मई के अंतिम हफ्ते (या हिंदी महीने ज्येष्ठ) में जब सूर्य चंद्रमा के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करता है तो नवतपा प्रारंभ हो जाता है।

दिल्ली के विश्व ज्योतिषी एवं ग्रह शान्ति रेमेडी एक्सपर्ट पं नरेंद्र चतुर्वेदी ने जन कल्याण हेतु बताया कि नवतपा के समय क्या करें और क्या न करें।
उन्होंने समझाया -ज्योतिष गणना के अनुसार, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों के लिए आता है तो उन पंद्रह दिनों के पहले नौ दिन सर्वाधिक गर्मी वाले होते हैं। इन्हीं शुरुआती नौ दिनों को नवतपा कहते हैं। *खगोल विज्ञान के अनुसार, इस समय 🌍पृथ्वी और 🌞सूर्य की दूरी बहुत कम हो जाती है और सूर्य की किरणें सीधी पृथ्वी पर आती हैं। इस कारण तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है और अधिक गर्मी पड़ती है। इसके कारण मैदानी इलाकों में निम्न दबाव का सिस्टम बनता है जो समुद्र की लहरों को आकर्षित करता है।यदि नवतपा के सभी दिन पूरे तपें, तो यह अच्छी बारिश का संकेत होता है।
वैसे चंद्र देव रोहिणी नक्षत्र के स्वामी हैं, जो शीतलता का कारक हैं, परंतु इस समय वे सूर्य के प्रभाव में आ जाते हैं।इसलिए शीतलता नही देते और गर्मी बढ़ जाती है। पंचांग के अनुसार 25 मई 2025 को ग्रहों के राजा सूर्य रोहिणी नक्षत्र में सुबह 03 बजकर 27 मिनट पर गोचर करेंगे। सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 8 जून 2025 तक रहने वाले हैं। ऐसे में 25 मई 2025 से नौतपा की शुरुआत होगी और 02जून तक रहेगी।
पं चतुर्वेदी जी ने बताया कि सूर्य की गर्मी और रोहिणी के जल तत्व के कारण मानसून गर्भ में आ जाता है। नौतपा ही मानसून का गर्भकाल माना जाता है। जिस समय में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में होते हैं उस समय चन्द्रमा नौ नक्षत्रों में भ्रमण करते हैं, इस कारण से भी इसे नौतपा कहते हैं । ज्येष्ठ माह में सूर्य के वृषभ राशि के 10 अंश से लेकर 23 अंश 40 कला तक को नवतपा कहा जाता है।

सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में आने का प्रभाव:–
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27मई को बुध रोहिणी में 59.7घड़ी पर,29में को गुरु मृगशिरा में 58.20घड़ी पर, 31मई को शुक्र अश्वनी में 15.20घड़ी पर आने से तथा चंद्र-राहु का समसप्तक योग बनने से इस समय में तेज हवा के साथ तेज वर्षा की पूर्ण संभावना है।

नवतपा का पौराणिक महत्व:–
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नवतपा का ज्योतिष के साथ-साथ पौराणिक महत्व भी है। घर के बाहर की धूप और गर्मी असहनीय हो जाती है। यही सूर्य, पृथ्वीवासियो को पानी का सम्मान कराना सिखाता है क्योंकि इस समय पृथ्वी पर पेय-जल का संकट परमसीमा पर होता है,भूगर्भ में पानी सूखने को होता है,बोरवेल भी खराब होने लगती है,नदी-तालाब सूखकर मानो अब सूर्य के “”आर्द्रा””नक्षत्र में आने की राह तकते है।
सूर्य गति का नियम और नवतपा का वर्णन श्रीमद् भागवत में भीआता है। जब से ज्योतिष की रचना हुई, तभी से ही नवतपा भी चला आ रहा है।इसलिए सनातन सस्कृति में सदियों से सूर्य को देवता के रूप में पूजा जारहा है।

नवतपा में गर्मी से वचने के उपाय :—
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1⃣अपने शरीर में पानी की बिल्कुल कमी ना होने दे,भोजन से अधिक ताजे फलों का जूस पिएं। घर से पानी,इलेक्ट्रॉल लेकर निकलें। पानी की बर्बादी से बचे।
2⃣यदि धूप में घर से बाहर नौकरी, व्यवसाय,कोचिंग या व्यापार हेतु निकलना हो तो अपने जेब या किसी भी वस्त्र में “प्याज” अवश्य रखे। घर के बाहर पक्षियों के लिये किसी कटोरे में पानी की व्यवस्था करें।
3⃣आप जिस ग्रह को मजबूत करना चाहते हो उस ग्रह से संबंधित रंग की शीशे की बोतल में पानी भरकर ढक्कन ढकके धूप में रखे दें। ये पानी आप शाम को पी ले, ये उपाय पूरे नौ दिन करे। इस उपाय के लिए नवतपा का समय ही श्रेष्ठ होता है।
4⃣घर से बाहर जाते समय काले वस्त्रों से परहेज करें। शरीर पर सन क्रीम या नारियल का तेल लगाकर निकले। चेहरे को ढके रखें।

5⃣जड़ भोजन,जंक फूड,माँस-मटन से नवतपे में परहेज रखें। भोजन कम ही करे। शराब,चाय और कॉफ़ी भी कम पिएं।

नौतपा में क्या करें और क्या न करें?:—–


  • हर सुबह स्नान के बाद सूर्य को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें और ‘ॐ सूर्य देवाय नमः’ मंत्र का जाप करें। इससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और मानसिक शांति मिलती है।
  • इस दौरान नियमित रूप से आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। इससे मन शांत रहता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • यदि कोई जरूरतमंद व्यक्ति आपके द्वार पर कुछ मांगने आए तो उसे खाली हाथ न जाने दें। अपनी क्षमता अनुसार जल, फल या अन्य आवश्यक वस्तुएं दान करें।
  • नौतपा के दौरान राहगीरों को पानी पिलाना या प्याऊ लगवाना बहुत पुण्यदायक होता है।
  • इन दिनों लहसुन, बैंगन, मांसाहार जैसी गर्म तासीर वाली चीजों से बचें। अधिक से अधिक पानी, फल और ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करें।

नौतपा में इन चीजों का करें दान :—-


शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ मास में किया गया दान महादान माना गया है। नौतपा में आप इन चीजों का दान कर सकते हैं। मौसमी फल (जैसे तरबूज, खीरा, आम), सत्तू या चने का आटा, छाता, मिट्टी का मटका, सूती वस्त्र या हाथ का पंखा। मान्यता है कि इससे न केवल जरूरतमंदों की मदद होती है, बल्कि आपकी कुंडली में सूर्य की स्थिति भी मजबूत होती है।
—जय श्री कृष्ण —-

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