भावी चिकित्सकों को दी बदलते वैश्विक दंत चिकित्सा क्षेत्र की जानकारी


सतत दंत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम में डॉ. विशाल गुप्ता ने साझा किए अनुभव
मथुरा। दंत स्वास्थ्य सौंदर्यबोध ही नहीं बल्कि समग्र स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। आप कहीं भी रहते हों दांतों की नियमित जांच, उचित ब्रशिंग और संतुलित आहार के जरिए अच्छी मौखिक स्वच्छता बनाए रखना बेहद जरूरी है। हम वैश्विक स्तर पर दंत चिकित्सा के परिदृश्य को समझकर, सभी के लिए बेहतर मौखिक स्वास्थ्य सुनिश्चित कर सकते हैं। यह बातें के.डी. डेंटल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल में सतत दंत चिकित्सा शिक्षा (सीडीई) कार्यक्रम में जाने-माने दंत चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. विशाल गुप्ता ने बताईं।
के.डी. डेंटल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल तथा पीएफए इंडिया सेक्शन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सतत दंत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम में डॉ. विशाल गुप्ता ने वैश्विक डेंटल सिनारियो, संक्रमण नियंत्रण, डिजिटल दंत चिकित्सा, हड्डी ग्राफ्टिंग और निर्देशित हड्डी रीजनरेशन (जीबीआर) सहित महत्वपूर्ण विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने स्नातक और स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वे दंत चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे बदलावों को न केवल जानें बल्कि अपने ज्ञान और कौशल में भी इजाफा करें।
डॉ. विशाल गुप्ता एक समर्पित और उत्साही दंत चिकित्सक हैं, जोकि 2008 से ओरल इम्प्लांटोलॉजी के क्षेत्र में कार्यरत हैं। डॉ. गुप्ता ने के.डी. डेंटल कॉलेज से ही अपनी दंत चिकित्सा की डिग्री पूरी की। पढ़ाई के दौरान उन्होंने 2009 में “साइनस ऑग्मेंटेशन तकनीकों” पर अपने काम के लिए अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन से स्टूडेंट क्लीनिशियन अवॉर्ड नामक एक प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता। उनका काम इतना प्रभावशाली था कि 2009 में उन्हें अन्य विजेताओं के साथ इंडियन डेंटल एसोसिएशन पत्रिका के कवर पेज पर भी छापा गया।
स्नातक होने के बाद डॉ. विशाल गुप्ता ने अपनी शिक्षा जारी रखी और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफ़ोर्निया, लॉस एंजिल्स (यूसीएलए), यूएसए और गाइड इंस्टीट्यूट से इम्प्लांट डेंटिस्ट्री में मास्टर क्लीनिशियन वन ईयर प्रोग्राम पूरा किया। डॉ. गुप्ता को दंत चिकित्सा के क्षेत्र में कई अवॉर्ड मिल चुके हैं, जिनमें आईसीओआई (यूएसए), डब्ल्यूसीओआई (जापान) के फेलो और डिप्लोमेट तथा अंतरराष्ट्रीय दंत चिकित्सा संगठनों के फेलो शामिल हैं।
सतत दंत चिकित्सा शिक्षा (सीडीई) कार्यक्रम में डॉ. विशाल गुप्ता ने छात्र-छात्राओं से वैश्विक दंत चिकित्सा परिदृश्य पर दंत चिकित्सा के वर्तमान परिदृश्य और चुनौतियों पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने रोगी देखभाल में सुधार के तहत संक्रमण नियंत्रण, रबर डैम के उपयोग और उचित केस इतिहास रिकॉर्डिंग पर जोर दिया। डॉ. गुप्ता ने डिजिटल दंत चिकित्सा की प्रगति के साथ अद्यतन रहने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अस्थि प्रत्यारोपण और अस्थि पुनर्जन्म (जीबीआर) में नवीनतम तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर भी चर्चा की। डॉ. गुप्ता ने भावी दंत चिकित्सकों को वैश्विक दंत चिकित्सा पर स्थानीय देखभाल से लेकर वैश्विक प्रभाव तक की जानकारी दी।
सतत दंत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम की सफलता में कमेटी सदस्यों डॉ. सिद्धार्थ सिसोदिया, डॉ. अनुज गौर, डॉ. विवेक शर्मा, डॉ. मनीश भल्ला तथा डॉ. जुही दुबे का अहम योगदान रहा। विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश, डॉ. शैलेन्द्र, डॉ. नवप्रीत तथा प्रशासनिक अधिकारी नीरज छापड़िया आदि ने छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शन किया। अंत में मुख्य वक्ता ने प्रमाण-पत्र प्रदान कर छात्र-छात्राओं का हौसला बढ़ाया। प्राचार्य और डीन डॉ. मनेष लाहौरी ने रिसोर्स परसन डॉ. विशाल गुप्ता का पुष्पगुच्छ भेंटकर आभार माना। आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल तथा प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि मेडिकल क्षेत्र में लगातार बदलाव हो रहे हैं, ऐसे में छात्र-छात्राओं का अपडेट रहना बहुत जरूरी है।
चित्र कैप्शनः प्राचार्य और डीन डॉ. मनेष लाहौरी तथा रिसोर्स परसन डॉ. विशाल गुप्ता के साथ छात्र-छात्राएं। दूसरे चित्र में रिसोर्स परसन डॉ. विशाल गुप्ता को पुष्पगुच्छ भेंट करते हुए प्राचार्य और डीन डॉ. मनेष लाहौरी।

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