



गीता शोध संस्थान व रास्लीला अकादमी में तीन दिवसीय भारत नेपाल साहित्य-सांस्कृतिक महोत्सव- 2025 में दो दर्जन पुस्तकों का लोकार्पण
महोत्सव में दोनों देशों के 150 लेखक, साहित्यकार, रंगकर्मी, शिक्षाविद, शिक्षकों के प्रतिभाग
वृंदावन ( मथुरा)। नेपाल के कुलपति डा घनश्याम न्यौपाने ने कहा कि नेपाल में हिन्दी बोली जाती है, वैसे ही भारत के लोग नेपाली भाषा सीखें। दोनों देशों के बीच साहित्य व संगीत का आदान प्रदान और बढ़ना चाहिए। नेपाल व भारत दोनों भाई हैं। दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासत अमिट है। इसे मिटाया नहीं जा सकता।
शुक्रवार को वृंदावन स्थित गीता शोध सस्थान् व रास्लीला अकादमी में आयोजित तीन दिवसीय भारत नेपाल साहित्य सांस्कृतिक महोत्सव 2025 के शुभारम्भ अवसर पर अध्यक्षता करते हुए डा घनश्याम न्यौपाने परिश्रमी ने कहा कि नेपाल और भारत के ऐतिहासिक संबधों की मजबूती के लिए इस तरह के आयोजनों की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है। कार्यक्रम आयोजक डॉ विजय पंडित और डा हर्ष शर्मा ने कहा कि भारत नेपाल साहित्य एवं सांस्कृतिक महोत्सव वसुद्धैव कुटुम्बकम की भावना के साथ दोनों देशों के मध्य ऐतिहासिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूती प्रदान करना है। यह आयोजन दोनों देशों के लोगों के बीच परस्पर सहयोग की भावना, भाईचारा, प्रेम, साहित्य का अनुवाद व विस्तार प्रदान करते हुए साहित्यिक सेतु का निर्माण करता है। विशिष्ट अतिथि नेपाल की लघुकथाकार श्रीमती ममता मृदुल रही। इस दौरान लघुकथा सत्र में 25 लघुकथाकार व साहित्यकारों की एक दर्जन पुस्तकों का लोकार्पण हुआ।
इस मौके पर उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्याम बहादुर सिंह ने कहा कि यह सौभाग्य है कि वृंदावन में भारत नेपाल साहित्य संस्कृत महोत्सव का आयोजन हो रहा है। इस आयोजन से भारत और नेपाल के मध्य जो सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत के संबंध हैं उनका विस्तार मिलेगा। मुझे खुशी है कि यहां शिक्षा विद लेखक साहित्यकार आए हैं।
उन्होंने कहा कि मैं जनपद महाराजगंज का रहने वाला हूं, जो नेपाल के निकट है। भारत के साथ नेपाल से आए महानुभाव का अभिनंदन करते हुए बेहद खुशी हो रही है।
इससे पूर्व महोत्सव का शुभारंभ नेपाल के कुलपति डा घनश्याम न्यौपाने परिश्रमी, नेपाल के साहित्यिकार डा देवी पंथी, पूर्व प्राचार्य डा के के शर्मा, राधारमण मंदिर के सेवायत पद्मनाभ गोस्वामी, ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डा उमेश चंद्र शर्मा, गीता विशेषज्ञ महेश चंद्र शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलन किया। सरस्वती वंदना शीतल राघव देवयानी द्वारा प्रस्तुत की गई। संचालन डा हरेन्द्र हर्ष और गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने किया। गीता शोध संस्थान के निदेशक डॉ दिनेश खन्ना आभार व्यक्त किया।