संस्कृति स्कूल आफ नर्सिंग के छात्र करेंगे जर्मनी, जापान में नौकरी

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संस्कृति स्कूल आफ नर्सिंग के छात्र करेंगे जर्मनी, जापान में नौकरी

मथुरा। संस्कृति स्कूल आफ नर्सिंग और जिला रोजगार कार्यालय के सम्मिलित प्रयासों से रोजगार के क्षेत्र में विवि के विद्यार्थियों को नए अवसर मिले हैं। संस्कृति स्कूल आफ नर्सिंग के विद्यार्थियों को इज़राइल, जापान और जर्मनी में उच्च वेतनमान पर नौकरी करने का अवसर मिला है।
संस्कृति विश्वविद्यालय के सभागार में संस्कृति स्कूल आफ नर्सिंग, संस्कृति प्लेसमेंट सेल और जिला रोजगार कार्यालय के समन्वित प्रयासों से विदेशों में रोजगार के अवसरों के प्रति एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता जिला रोजगार कार्यालय अधिकारी सुश्री सुगंधा जैन ने विशेष रूप से नर्सिंग के विद्यार्थियों को जानकारी देते हुए बताया कि आपने इस कोर्स में प्रवेश लेकर अपने सुनिश्चित भविष्य का चयन किया है। हमारे देश में ही नहीं विदेशों में नर्सिंग सेवाओं के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित और डिग्रीधारक विद्यार्थियों की जरूरत है। उन्होंने विद्यार्थियों को विश्वसनीय पोर्टल की सूची बताते हुए कहा कि यहां आप अपना रजिस्ट्रेशन कराकर विदेशों में बहुत ही अच्छे वेतनमान पर रोजगार पा सकते हैं। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान ही विभिन्न वेबसाइट पर रोजगार कार्यालय के माध्यम से विद्यार्थियों के रजिस्ट्रेशन कराए। उन्होंने बताया कि इजराइल, जापान और जर्मनी में इस समय नर्सिंग के क्षेत्र में बहुत सारे अवसर हैं।
कार्यक्रम के दौरान संस्कृति नर्सिंग स्कूल के प्राचार्य डा. केके पाराशर ने बताया कि रोजगार कार्यालय मथुरा के सहयोग से 42 विद्यार्थियों ने विदेशों में नौकरी के लिए रजिस्ट्रेशन कराए हैं। डा. पाराशर ने बताया कि यह एक ऐसा क्षेत्र हैं जहां कोर्स करने के बाद शत-प्रतिशत रोजगार की संभावना होती है। आपका परिश्रम और समर्पण आपको बहुत आगे तक ले जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत में नर्सिंग के क्षेत्र में प्रशिक्षित लोगों की बड़ी जरूरत है लेकिन विदेशों में उच्च वेतनमान के कारण विद्यार्थियों का वहां जाने के प्रति विशेष आकर्षण रहता है।
कार्यक्रम के मध्य संस्कृति प्लेसमेंट सेल के जयवर्धन नगाइच ने विभिन्न देशों में रिक्तियों की जानकारी देते हुए बताया कि संस्कृति विवि के बच्चे किस-किस देश में नौकरी कर रहे हैं। कार्यक्रम में मुकुल, अमनदीप दुबे भी मौजूद रहे। अंत में संस्कृति स्कूल आफ इंजीनियरिंग की डा. रीना रानी से सभी वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

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