संस्कृति विवि दीक्षारंभः नगर आयुक्त ने विद्यार्थियों को दिखाई दिशा,पूर्व जनरल ने भरा जोश

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मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय का दीक्षारंभ 2026 अपनी भव्य परंपराओं के
साथ शुरू हुआ। तीन दिवसीय इस आयोजन का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ
हुआ। समारोह में आए विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गजों ने संस्कृति
विश्वविद्यालय के संतोष मैमोरियल आडिटोरियम के मंच से अपनी अपनी उच्च
शिक्षा की यात्रा शुरू करने वाले विद्यार्थियों को अपने अनुभवों के साथ
भविष्य निर्माण के लिए जरूरी मूल्यों और सिद्धांतों के बारे में विस्तार
से बताया। वक्ताओं ने कहा कि सबसे पहले अपना लक्ष्य तय करें और फिर उस
लक्ष्य को हासिल करने के लिए अच्छे चरित्र, अनुशासन एवं साहस के साथ आगे
बढ़ें, आपको सफलता अवश्य मिलेगी।
मथुरा नगर निगम के आयुक्त आईएएस ओजस्वी राज ने विद्यार्थियों को बताया कि
युवाओं के लिए जरूरी है कि वे विज्ञान और तार्किक बुद्धि का इस्तेमाल
करें। ऐसा करने से हमेशा परिणाम अच्छे आते हैं। उन्होंने रामायण का
संदर्भ देते हुए कहा कि रावण हर दृष्टि से राम से अधिक सामर्थ्यवान था
लेकिन एकमात्र चरित्र के कारण उसे पराजय का सामना करना पड़ा। हमारे जीवन
में चरित्र का बहुत बड़ा प्रभाव होता है। चरित्र मजबूत रखेंगे तो विचलन
मात नहीं दे पाएंगे। किसी भी महान पुरुष की आत्मकथा पढ़ लें, कई बार उनके
जीवन में भटकाने वाली परिस्थितियां आईं लेकिन वे विचलित नहीं हुए आगे
बढ़े। मेरी गारंटी है कि सही-गलत को मांपने की क्षमता पैदा कर लें आप सफल
होंगे। आप अपने स्टार्टअप शुरू करें, सरकार आपके साथ है। आप सौभाग्यशाली
हैं कि ऐसे विवि में शिक्षा पाने का अवसर मिला है जो आपके कदम के साथ कदम
मिलाकर चलने को तैयार है। उन्होंने अपने बलिया (उप्र) के कार्यकाल में
शुरू किए दलिया, सत्तू निर्माण के स्टार्टअप के बारे में विस्तार से
जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने सरकारी सहयोग
से छोटे से स्टार्टअप को इस स्तर तक पहुंचा दिया कि अब उनके ये प्रोडक्ट
विदेशों में जा रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को कहा कि हमारी कृषि
में बहुत स्कोप है। वहां चने की खेती नहीं होती थी सत्तू के लिए चना बाहर
से मंगाना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब वहां चने की खेती हो रही
है। महिलाओं का यह स्टार्टअप पूर्वांचल का बड़ा बन चुका है।
नगर आयुक्त ना बताया कि बलिया जिसे पिछड़ा इलाका माना जाता था वहा हमने
बेसिक शिक्षा के 17 स्कूलों में साइंस लैब बनाई, एआई और मशीन लर्निंग की
कक्षाएं शुरू कीं। इसको इतनी सफलता मिली कि प्राइवेट स्कूलों ने इन
स्कूलों का अनुसरण शुरू किया। बीबीसी की टीम इन स्कूलों में आई और उसको
कवर किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सोच बच्चों में चेतना जगाती है।
बच्चों की चेतना जागेगी तो हम अगले 25 वर्ष में बहुत आगे तक जाएंगे।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि नकारत्मकता को त्यागकर आगे बढ़ना
चाहिए। युवाओं को नकारत्मक होना शोभा नहीं देता।
विशिष्ठ अतिथि अवकाशप्राप्त भारतीय सेना के मेजर जनरल जीडी बख्शी ने एक
जोशीले सैनिक की तरह अपने ओजस्वी वक्तव्य से युवाओं में जोश भर दिया।
युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों की वीरता के तमाम किस्से सुनाते हुए
उन्होंने कहा कि डरो नहीं निडर हो जाओ। डरोगे नहीं तो हर मैदान को फतह कर
लोगे। आप युवा ही इस देश को महाशक्ति बना सकते हैं। हमने पाकिस्तान को दो
टुकड़ों में तोड़ा था आप उसको पांच टुकड़ों में जब तक नहीं तोड़ दो तब तक
चैन से नहीं बैठना। उन्होंने विद्यार्थियों को स्टार्टअप शुरू कर रोजगार
देने वाला बनने के लिए प्रेरित किया। चुनौतियां आती हैं उनका सामना करना
चाहिए। जिस चीज से डर लगे उस चीज पर ही काबू पाने की कोशिश करो, डर दूर
हो जाएगा। सितारों की तरफ छलांग लगा दो, तुम मंजिल हासिल करोगे, डरना मत।
जो डर गया सो मर गया। जनरल बख्शी ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा जो कुछ
करो देश के लिए करो। मूल्यों को सीखो, पहला मूल्य मेरा देश, दूसरा मूल्य
देशभक्ति और तीसरा मूल्य मेरा देश एक जमीन का टुकड़ा नहीं एक भावना है,
जिसके लिए मैं मर सकता हूं, मार सकता हूं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर संस्कृति विवि के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता
ने श्री बांके बिहारी की जय के उद्घोष के साथ विद्यार्थियों को प्रेरित
करते हुए कहा कि, तकदीर बदल सकती है, तद्बीर बदल सकती है, इंसान खुद पर आ
जाए तो तस्वीर बदल सकती है। उन्होंने कहा कि दूसरों में कमियां देखना,
निकालना बहुत आसान है पर जब खुद करके देखो तो समझ आता है। उन्होंने कहा
कि सीखने के क्रम में दूसरों की प्रतिक्रियों की परवाह करना छोड़ो। अपने
पर भरोसा कर दूसरों की प्रतिक्रिया पर ध्यान दिए बिना अपना काम करो। हर
विद्यार्थी तीन चार साल के लिए अपना टार्गेट तय करे और उसको पूरा करने के
लिए जुट जाए। विवि आपके साथ है। अपने आप से झूठ बोलना छोड़ें, ईमानदार
बनें। बनावटीपन बहुत दिनों तक छुपता नहीं है। आपका ज्ञान, कौशल, चरित्र
और व्यवहार अच्छा होना चाहिए। अपने कैरियर का रोडमैप बनाएं। क्लास में
अधिक से अधिक उपस्थित रहें। 75 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी है। अपने शिक्षकों
से अधिक से अधिक पाने की कोशिश करें।
डा. सचिन गुप्ता ने विद्यार्थियों को सलाह देते हुए कहा कि हर सेमेस्टर
में एक आनलाइन कोर्स करिए। अपने आइडिया छुपा कर मत रखिए, प्रयास करिए
उनपर काम करने का। हिम्मत मत हारिए, असफल होने से मत डरिए। किसी न किसी
महान पुरुष की आत्मकथा जरूर पढ़िए और उससे सीखिए आगे बढ़ना। कार्यक्रम के
दौरान डीन एसओईआईटी डा. पंकज गोस्वामी ने विद्यार्थियों को संस्कृति विवि
के एजूकेशन सिस्टम, परीक्षा नियंत्रक विभाग के विनोद सारस्वत, स्कूल आफ
एग्रीकल्चर के प्रिंसिपल डा. कंचन कुमार सिंह ने विवि द्वारा संचालित
छात्रवृत्तियों के बारे में विस्तार से बताया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में कुलपति प्रो.एमबी चेट्टी ने अतिथियों का स्वागत
करते हुए नवीन विद्यार्थियों को विवि के बारे में विस्तार से बताया और
उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। अंत में डीन एकेडमिक डा. रेनू
गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन संस्कृति
स्कूल आफ होटल मैनेजमेंट की असिस्टेंट प्रोफेसर शुभांगी सक्सैना ने किया।
कार्यक्रम के संयोजन में डा. दुर्गेश वाधवा आदि का विशेष योगदान रहा।

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