मीडिया को लेकर दिए गए बयान पर मनोज कुमार शर्मा का तीखा विरोध

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वृन्दावन स्थित गौरी गोपाल आश्रम के मुखिया एवं कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य द्वारा भारत के चौथे स्तंभ—मीडिया कर्मियों—को लेकर दिए गए बयान पर कड़ा विरोध दर्ज किया गया है। भारतीय पत्रकार सेवा संघ, मथुरा के पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज कुमार शर्मा ने इस बयान को तथ्यों से परे और अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए इसकी निंदा की है।मनोज शर्मा ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र की रीढ़ है और उस पर इस प्रकार की टिप्पणी सीधे तौर पर एक संवैधानिक संस्था पर प्रहार है। मीडिया कर्मी षड्यंत्र रचने वाले नहीं, बल्कि समाज में हो रहे अन्याय और षड्यंत्रों को उजागर करने वाले होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मीडिया का उद्देश्य भ्रम फैलाना नहीं, बल्कि सच को सामने लाना, जनहित की रक्षा करना और सत्ता को संविधान की मर्यादा में रखना है।उन्होंने कहा कि भारत का मीडिया किसी व्यक्ति, विचारधारा या मंच से संचालित नहीं होता, बल्कि भारत के संविधान से संचालित होता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता न केवल मीडिया का अधिकार है, बल्कि उसका कर्तव्य भी है। सत्ता से सवाल पूछना विद्रोह नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सेवा है।मनोज शर्मा ने यह भी कहा कि मीडिया पर नकारात्मक भूमिका निभाने का आरोप उन लाखों पत्रकारों के संघर्ष का अपमान है, जो सीमाओं पर शहीदों की आवाज़ बनते हैं, पीड़ितों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ते हैं और भ्रष्टाचार के अंधेरों में सच का दीप जलाते हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि धर्म, कथा और प्रवचन का उद्देश्य समाज को जोड़ना और सत्य के मार्ग पर प्रेरित करना है। ऐसे मंचों से लोकतांत्रिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करना न तो धर्म की गरिमा के अनुरूप है और न ही समाज हित में। मीडिया समाज का “सकुनी” नहीं, बल्कि लोकतंत्र का सजग प्रहरी है और वह संविधान के अनुरूप कार्य करते हुए समाज हित में प्रश्न करता रहेगा।

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