रायबरेली ब्यूरो धीरेन्द्र शुक्ल
जनपद रायबरेली के जिला अस्पताल में इंसानियत का लातों से इलाज, आया की दबंगई और गार्ड की खामोशी से मानवता शर्मसार,
अस्पताल केवल इलाज की इमारत नहीं होता, बल्कि वह इंसानियत का सबसे बड़ा आश्रय होता है। यहां आने वाला हर व्यक्ति चाहे वह गरीब हो, बेसहारा हो, मानसिक रूप से अस्वस्थ हो या नशे की हालत में सबसे पहले एक मरीज और इंसान होता है। ऐसे स्थान पर सेवा, धैर्य और संवेदनशीलता ही सबसे बड़ा धर्म माने जाते हैं। रायबरेली जिला अस्पताल से सामने आया वायरल वीडियो इन्हीं मानवीय मूल्यों को शर्मसार करता दिखाई देता है। वीडियो में एक वार्ड आया पिंकी कथित रूप से नशे में धुत व्यक्ति को लातों से मारते हुए और अपशब्द कहते हुए नजर आ रही है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि मौके पर मौजूद सुरक्षा गार्ड मूकदर्शक बना तमाशा देखता रहा। यदि व्यक्ति नशे की हालत में था और व्यवस्था में बाधा बन रहा था, तो नियमों के अनुसार उसे संयमपूर्वक अस्पताल परिसर से बाहर कराया जा सकता था। किसी कर्मचारी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। अस्पतालों में कार्यरत अधिकांश डॉक्टर, नर्सें और कर्मचारी दिन-रात सेवा, करुणा और समर्पण का परिचय देते हैं। कुछ क्षणों की अमानवीयता उनकी पूरी छवि को धूमिल कर देती है। इसलिए इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो और संबंधित वार्ड आया के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई तथा मूकदर्शक बने सुरक्षा गार्ड की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। अस्पताल की पहचान भय से नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और मानवता से होनी चाहिए।
