संस्कृति विवि में ओपेरा के मंचन पर पूर्व मंत्री ने दिया समरसता का संदेश

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मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के संतोष मैमोरियल आडिटोरियम में जार्जिया के एक नाटक की संगीतमय प्रस्तुति(ओपेरा) के दौरान मुख्य अतिथि भारत सरकार की पूर्व विदेश और संस्कृति राज्य मंत्री श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने कहा कि हमें विरासत और विकास के लिए हमें जड़ों को संरक्षित रखना होगा तभी हम मजबूत होंगे। युवा छात्रों को यह जानना होगा कि हम जो सीखते हैं उससे समाज को क्या दे सकते हैं।
मुख्य अतिथि श्रीमती लेखी ने संस्कृति विवि के विद्यार्थियों को बताया कि आज आपको एक अद्भुत अनुभव होने जा रहा है। जार्जिया का यह ओपेरा, मशहूर सोप्रानो मारिया कैलस की विरासत को सम्मान देने के लिए जार्जिया के प्रसिद्ध डायरेक्टर राबर्ट स्टुरुआ द्वारा तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी में हम भिन्नता खोजेंगे तो हमें भिन्नता नजर आएगी और समानता खोजेंगे तो समानता नजर आएगी। सत्य तो सत्य होता है और वो एक ही है। उन्होंने बताया कि जार्जिया समुद्र के किनारे एक सुंदर देश है। यहां की विरासत बहुत समृद्ध है। मैंने वहां जाकर बहुत सुंदर प्राकृतिक स्थान देखे और उनकी परंपराओं को देखा। थियेटर की दुनिया में राबर्ट स्टुअरा एक बहुत सम्मानित नाम है आज आपको उनका काम देखने का मौका मिल रहा है। उन्होंने संस्कृति विवि को विज्ञान और तकनीकि की शिक्षा का एक उत्कृष्ट केंद्र बताते हुए यहां के वातावरण की जमकर तारीफ की।
जार्जिया के 90 वर्षीय मशहूर ओपेरा डाइरेक्टर राबर्ट स्टुअरा ने बड़े निराले अंदाज में कहा कि भारत के बारे में बहुत सारी बातें पहले से पता थीं, लेकिन यहां आकर महसूस हुआ कि वो सब जानकारी बहुत कम थीं। मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि मेरी नातिनी का जिससे विवाह होने जा रहा है उसका नाम कृष्ण है और आज मैं उस कृष्ण की जन्मभूमि पर अपना काम दिखाने आया हूं। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं है मैं लगातार यहां के लोगों और यहां की तस्वीरें अपनी नातिनी को भेज रहा हूं। इस दौरान भारत और जार्जिया के बारे में उल्टा-सीधा बताने और दिखाने के लिए बीबीसी की आलोचना करने में कोई संकोच नहीं किया। उन्होंने बड़े सरल अंदाज में कहा कि मैं कैसा हूं ये आपको मेरा नाटक देखकर ही तय करना होगा।
संस्कृति विवि के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता ने जार्जिया से आए निर्देशक राबर्ट स्टुअरा और अन्य सभी कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि आज हम पूर्व मंत्री श्रीमती मीनाक्षी लेखी का यहां आने पर आभार व्यक्त करते हैं। आपने दिल्ली में महिलाओं के लिए उल्लेखनीय कार्य कर अपनी एक अलग छवि बनाई। हमारे प्रधानमंत्री मोदीजी और श्रीमती लेखी ने विदेशों में भारत की जो सम्मानजनक छवि बनाई है वो अतुलनीय है। डा. सचिन गुप्ता ने विद्यार्थियों से आज के इस अनूठे आयोजन का भरपूर आनंद लेने को कहा। उन्होंने जार्जिया के रुस्तावेली नेशनल थिएटर की भी प्रशंसा की जिसने संस्कृति विवि में अपने ओपेरा को प्रस्तुत करने का निर्णय लिया। एनजीओ कल्चरल डाइवर्सिटी फॉर पीसफुल फ्यूचर के चेयरमैन और प्रतिष्ठित प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार के प्राप्तकर्ता, ने भारत और जॉर्जिया के बीच आपसी समझ और लंबे समय तक लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने में सांस्कृतिक आदान-प्रदान के महत्व के बारे में बात की।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कृति विवि के विद्यार्थियों द्वारा सरस्वती वंदना और अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डा. श्रीमती मीनाक्षी शर्मा द्वारा मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री श्रीमती लेखी का पटुका ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया। कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता द्वारा राबर्ट स्टुअरा और सभी कलाकारों का गर्मजोशी के साथ सम्मान किया गया। अंत में संस्कृति विवि के कुलपति प्रो. एमबी चेट्टी धन्यवाद प्रेषित किया। कार्यक्रम का समग्र समन्वय और प्रबंधन संस्कृति यूनिवर्सिटी के इंक्युबेशन सेंटर के सीईओ डॉ. गजेंद्र सिंह ने कुशलतापूर्वक किया। कार्यक्रम का संचालन संस्कृति विवि की ज्योति यादव ने किया।

संस्कृति विवि में जार्जिया के मशहूर ओपेरा मारिया कैलस मास्टरक्लास का मंचन

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में जार्जिया के जार्जिया के रुस्तावेली नेशनल थिएटर द्वारा रॉबर्ट स्टुरुआ के निर्देशन में मारिया कैलस मास्टर क्लास नाटक की संगीतमय प्रस्तुति(ओपेरा) ने सभी का दिल जीत लिया। जबर्दस्त अभिनय, डायलॉद डिलीवरी और मंच सज्जा का अद्भुत सम्मिश्रण देखने को मिला। संस्कृति विवि के विद्यार्थियों के लिए यह एक अनूठा यादगार अनुभव रहा।
यह अनूठा आयोजन जॉर्जिया की मिनिस्ट्री ऑफ़ कल्चर और रुस्तवेली नेशनल थिएटर के बीच एक कोलेबोरेशन के अंतर्गत हुआ है। इसमें मशहूर सोप्रानो मारिया कैलस की विरासत को सम्मान देने के लिए डिज़ाइन किया गया एक प्रभावशाली अनुभव है। जॉर्जिया के एक मशहूर डायरेक्टर राबर्ट स्टुअरा, मारिया कैलस मास्टरक्लास नाम के एक “मशहूर” ओपेरा(संगीतमय नाटक) शोकेस से जुड़े हैं। रॉबर्ट स्टुरुआ को हालांकि उन्हें मुख्य रूप से थिएटर में एक महान हस्ती के रूप में जाना जाता है, खासकर रुस्तवेली नेशनल थिएटर के साथ उनके काम के लिए, स्टुरुआ का इस ओपेरा-थीम वाले मास्टरक्लास का डायरेक्शन उनके क्रॉस-डिसिप्लिनरी प्रभाव को दिखाता है। ओपेरा में, स्टेज डायरेक्टर किरदारों की हरकतों और पूरी स्टेजिंग को राबर्ट सुटुअरा ने बखूबी अंजाम दिया। रॉबर्ट स्टुरुआ विलियम शेक्सपियर के कामों के अपने उलटे-सीधे और मेटाफरिकल मतलब निकालने के लिए जाने जाते हैं।
जॉर्जियाई भाषा में होने के बावजूद, नाटक ने अपने दमदार प्रस्तुतिकरण और सार्वभौमिक भावनात्मक अपील के ज़रिए दर्शकों के साथ गहरा जुड़ाव बनाया। यह कार्यक्रम जॉर्जिया के संस्कृति मंत्रालय और एनजीओ कल्चरल डाइवर्सिटी फॉर पीसफुल फ्यूचर के सहयोग से आयोजित किया गया था, जिसमें जाने-माने जॉर्जियाई कलाकारों को संस्कृति यूनिवर्सिटी के मंच पर लाया गया। जॉर्जियाई भाषा में होने के बावजूद, नाटक ने अपने दमदार परफॉर्मेंस और सार्वभौमिक भावनात्मक अपील के ज़रिए दर्शकों के साथ गहरा जुड़ाव बनाया। यह सांस्कृतिक शाम इस बात का एक उल्लेखनीय उदाहरण थी कि कैसे थिएटर सीमाओं, भाषाओं और संस्कृतियों से परे होता है, जो भारत और जॉर्जिया के साझा मूल्यों और समृद्ध कलात्मक विरासत को मज़बूत करता है।

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