रायबरेली ब्यूरो धीरेन्द्र शुक्ला की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के रायबरेली में चार दिन से गैस सिलेंडर नहीं मिलने पर महिला भड़क गई, एजेंसी कर्मी का गिरेबान पकड़ लिया और जबरन सिलेंडर ले जाने लगी, कर्मी के मना करने और पुलिस बुलाने की बात पर हंगामा भी शुरू हो गया
बेबसी और जीवनशैली में खराबी आने पर आम आदमी क्या करेगा। जो लड़ सकते हैं वो आखिरकार लड़ कर ले लेंगे और जो कमजोर हैं वे गिड़गिड़ाते रहेंगे। पर सवाल उठता है सिर्फ दावों से जमीनी हकीकत में फर्क आ जाता है ?
आम आदमी गैस सिलेंडर के लिए जूझ रहा है, जो ब्लैक में ले सकते हैं वे ले रहे हैं, यदि LPG पर्याप्त है तो सिलेंडर लोगों तक क्यों नहीं पहुंचता और अब तो कनेक्शनों पर भी खतरा मंडरा रहा है। किसी का कनेक्शन हट रहा है, तो किसी से अब एजेंसी/कंपनी KYC के लिए कह रही है। क्या अब कंपनियों को कागज़ी काम याद आ रहा है ,या माफियाओं के मददगार बने हुए हैं।
