छात्र-छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक से दिया स्तनपान का संदेश

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के.डी. मेडिकल कॉलेज में स्तनपान सप्ताह का समापन
‘माँ का दूध, हर बच्चे का अधिकार’
मथुरा। के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के छात्र-छात्राओं ने गुरुवार को संदेशपरक नुक्कड़ नाटक से महिलाओं और तीमरदारों को स्तनपान के महत्व की जानकारी दी। कम्युनिटी मेडिसिन विभाग द्वारा आयोजित इस नुक्कड़ नाटक का उद्देश्य स्तनपान के बारे में जागरूकता बढ़ाना, गलत धारणाओं को दूर करना तथा स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों से जुड़े मुद्दों पर प्रकाश डालना था। इससे पहले छात्र-छात्राओं ने रंगोली, पोस्टर मेकिंग, क्विज, रील आदि प्रतियोगिताओं में अपना बौद्धिक कौशल दिखाकर सभी की वाहवाही लूटी। स्तनपान सप्ताह के समापन अवसर पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत करने वाले छात्र-छात्राओं को अतिथियों द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
स्तनपान सप्ताह के अंतिम दिन मेडिकल छात्र-छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्तनपान के महत्व और उसके लाभों की जानकारी दी। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से छात्र-छात्राओं ने बताया कि नवजात शिशु के लिए मां का दूध अमृत समान है। यह शिशु को सभी आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है तथा उसे बीमारियों से भी बचाता है। छात्र-छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक में उन गलत परम्पराओं पर कटाक्ष किया जोकि शिशु के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। नुक्कड़ नाटक में यह भी बताया गया कि माताएं भीड़भाड़ में अपने बच्चे को कैसे दूध पिला सकती हैं। छात्र-छात्राओं ने माताओं को स्तनपान के स्वास्थ्य लाभों से प्रेरित करते हुए ‘माँ का दूध, हर बच्चे का अधिकार’ संदेश दिया। नुक्कड़ नाटक में नवजात शिशु को शहद अथवा बोतल से दूध पिलाने के दुष्परिणाम भी बताए गए।
विभागाध्यक्ष कम्युनिटी मेडिसिन डॉ. अमनजोत कौर चौहान ने बताया कि स्तनपान सप्ताह में मेडिकल छात्र-छात्राओं ने रंगोली, पोस्टर मेकिंग, क्विज, रील तथा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिलाओं और तीमारदारों को जो संदेश दिया उसका पालन कर स्वस्थ समाज के संकल्प को पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नवजात बच्चों के लिए मां का दूध अमृत समान है। स्तनपान करने वाले बच्चे दस्त, निमोनिया, सेप्टिक जैसी बीमारियों से बचे रहते हैं। इतना ही नहीं स्तनपान से महिलाएं मोटापे का शिकार नहीं होतीं तथा बच्चेदानी और ब्रेस्ट कैंसर से भी बच जाती हैं। डॉ. अमनजोत ने बताया कि जो बच्चे डिब्बा बंद या दूसरा दूध पीते हैं उनके मुकाबले मां का दूध पीने वाले बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से ज्यादा बेहतर होते हैं। इसलिए सभी माताओं को चाहिए कि वह अपने नवजात बच्चों को डेढ़ से दो साल की आयु तक स्तनपान जरूर करवाएं।
चिकित्सा निदेशक डॉ. राजेन्द्र कुमार ने के.डी. मेडिकल कॉलेज में एक से सात अगस्त तक शिशु रोग विभाग, महिला एवं प्रसूति रोग विभाग तथा सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा विश्व स्तनपान सप्ताह में आयोजित विविध कार्यक्रमों की सराहना की तथा मां के दूध से होने वाले फायदे बताए। स्तनपान सप्ताह में आयोजित कार्यक्रमों की कॉलेज के डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका, महिला एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. वी.पी. पांडेय, विभागाध्यक्ष शिशु रोग डॉ. के.पी. दत्ता, विभागाध्यक्ष सामुदायिक चिकित्सा डॉ. अमनजोत कौर, विभागाध्यक्ष मेडिसिन डॉ. मंजू पांडेय, विभागाध्यक्ष क्षय रोग डॉ. एस.के. बंसल आदि ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। इस अवसर पर डॉ. बिश्वाविनोद सानफुई, डॉ. स्वेता सिंह, डॉ. शुभ्रा दुबे, डॉ. अमन गुप्ता, डॉ. निशांत गुप्ता, डॉ. अंकुर कुमार आदि ने छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. निशांत गुप्ता ने किया तथा आभार डॉ. अमनजोत कौर ने माना।
चित्र कैप्शनः अतिथियों के साथ नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत करने वाले के.डी. मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राएं। नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत करते विद्यार्थी।

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