आपरेशन के बाद युवक की मौत, आक्रोशित ग्रामीणों ने किया उग्र प्रदर्शन*



रायबरेली ब्यूरो धीरेंद्र शुक्ला की रिपोर्ट

रायबरेली। शहर कोतवाली क्षेत्र के जेल रोड पर स्थित अवध हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद एक 22 वर्षीय युवक की मौत हो गई। जिसे लेकर डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने जबरदस्त हंगामा किया। बुधवार को हुए इस प्रदर्शन से करीब आधा घंटे तक जेल रोड पर यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। उच्चाधिकारी जब मौके पर पहुंचे और उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया तब जाकर परिजन शव का अंतिम संस्कार करने के लिए राजी हुए।
भदोखर थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर कुचरिया गांव के रहने वाले पंकज पुत्र संतोष गुप्ता ने बताया कि उसके भाई दीपक को काफी दिन से पथरी की शिकायत थी। रविवार को उसने अवध नर्सिंग होम में भाई का ऑपरेशन कराया। जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। बार-बार डॉक्टरों को बताने पर भी उसका समुचित इलाज नहीं किया गया। मंगलवार को जब युवक की जान पर बन आई तो अस्पताल ने उसे रेफर कर दिया। लखनऊ पहुंचने पर डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस पूरे मामले को लेकर गांव के लोग नाराज हो उठे। गुरुवार को नाराज गांव वाले मृतक का शव लेकर अवध हॉस्पिटल पहुंचे और बाहर सड़क पर रखकर हंगामा शुरू कर दिया। इस बात की खबर मिलते ही क्षेत्राधिकारी नगर अरुण कुमार नौहवार, नगर मजिस्ट्रेट राम अवतार और अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को समझा बूझकर शांत कराया और मामले की जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उधर हंगामा देखकर अस्पताल प्रशासन के हाथ पांव फूल गए और सभी वहां से फरार हो लिए। स्वास्थ्य विभाग ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया है।

आपको बताते चले कि पूर्व में भी यहां पर एक अस्पताल संचालि था। जिसमें अनियमित्ता और लापरवाही को लेकर विभागीय कार्रवाई हुई थी। इसीलिए नाम परिवर्तन कर नए नाम से यहां अस्पताल चल रहा था।
दूसरी तरफ इस मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें प्रधान और लखनऊ के एक डॉक्टर के बीच तीखी बातचीत हो रही है। आरोप है कि मृतक का ऑपरेशन इसी डॉक्टर ने किया था और यह लखनऊ से यहां घूम-घूम कर रायबरेली की अस्पतालों में ऑपरेशन करता है। दिन भर ऑपरेशन के बाद रात को एक मोटी रकम लेकर वापस लखनऊ चला जाता है। हालांकि विभागीय नियमों के अनुसार ऑपरेशन के बाद मरीज को सक्षम चिकित्सक की निगरानी में ही रखा जाता है। लेकिन शहर के अंदर जगह-जगह चल रहे नर्सिंग होम में अब यह एक परंपरा बन चुकी है कि नॉन मेडिको अस्पताल संचालक किराए के डॉक्टर बुलाकर ऑपरेशन करवा लेते हैं और उसके बाद पूरा इलाज अप्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी जैसे नर्स, वार्ड बॉय के द्वारा किया जाता है।
इसको लेकर अक्सर अखबारों में खबरें भी प्रकाशित होती हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग इन पर कोई ध्यान नहीं देता और जब रिनीवल का समय आता है तो बिना स्थलीय सत्यापन और जांच पड़ताल के सिर्फ कागजों के आधार पर नवीनीकरण की कार्रवाई हो जाती है। यही कारण है कि आए दिन नर्सिंग होम और अस्पतालों में लापरवाही से मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है।

आज दीपक गुप्ता की जान गई है। इससे पहले न जाने कितनी मौतें हुई होंगी। लेकिन आगे एक नई मौत के इंतजार में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं। खबर लिखे जाने तक शहर कोतवाली में इस प्रकरण को लेकर कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था। शहर कोतवाल शिव शंकर सिंह ने बताया कि अभी मामले की तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलते ही मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

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