आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 92वें दीक्षांत समारोह में शोधार्थी रवि कान्त को ‘डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी’ की मानद उपाधि से नवाजा गया। यह प्रतिष्ठित उपाधि उन्हें उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के कर-कमलों द्वारा प्रदान की गई। उन्होंने अपना शोध कार्य संस्कृत विभाग के प्रोफेसर कुमारपाल के कुशल निर्देशन में पूर्ण किया। उनके शोध का मुख्य विषय “मध्यकालीन वैष्णव भक्त निम्बार्काचार्य जी की दार्शनिक दृष्टि तथा वैचारिक अवदान: एक अध्ययन” रहा।
आचार्य निम्बार्क के ‘द्वैताद्वैत दर्शन’ और वैष्णव भक्ति-परंपरा को गहराई से समझने के लिए रवि कान्त ने दीर्घकालीन साधना और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया है। विषय विशेषज्ञों के अनुसार, यह शोध कार्य केवल एक अकादमिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारतीय दर्शन, संस्कृति और वैष्णव चिंतन के क्षेत्र में एक अमूल्य व युगांतरकारी योगदान है। इस गौरवमयी उपलब्धि पर उनके परिवार, गुरुजनों, मित्रों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई व उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।
मध्यकालीन वैष्णव भक्त निम्बार्काचार्य जी की दार्शनिक दृष्टि तथा वैचारिक अवदान: एक अध्ययन में पीएचडी उपाधि
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