


मथुरा। जन सांस्कृतिक मंच, मथुरा के स्वर्ण जयंती के अवसर पर गुरुवार को आर.सी.ए. गर्ल्स डिग्री कॉलेज में “मानवीय रिश्तों की बुनावट में प्रेम और हिंसा” विषय पर गोष्ठी एवं खुला संवाद कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता हंस पत्रिका की सहायक संपादक, लेखिका एवं कवयित्री शोभा अक्षर ने कहा, “प्रेम आजादी है। हिंसा के बरअक्स प्रेम एक प्रतिरोध है। स्त्रीवाद की जमीन को पितृसत्तात्मक समाज में सींचने के लिए सबसे मुखर रूप से पुरुषों को ही आगे आना होगा।” उन्होंने कहा कि जैसे ज्योतिबा फुले, डॉ. अंबेडकर, डॉ. लोहिया, ईश्वर चंद्र विद्यासागर और राजा राममोहन राय उस दौर में स्त्री मुक्ति के लिए आगे आए जब देश बनने की तैयारी कर रहा था और स्त्रियों की आवाजें उतनी शामिल नहीं थीं, वैसे ही आज भी पुरुषों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हिंसा को पुरुष और स्त्री में बांटकर देखना भी एक किस्म की वैचारिक हिंसा ही है, हमें उसके कारणों को रेखांकित कर उसे रोकने का कार्य करना चाहिए।
निर्मल इनिशिएटिव की निदेशिका डॉ. श्वेता गोस्वामी ने कहा कि हिंसा के आगे खुद का हारा हुआपन है। प्रेम सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करने की शक्ति रखता है और प्रेम का विलोम हिंसा नहीं है।
लेखिका एवं समाचार वाचिका पारुल बंसल ने कहा, “प्रेम सम्मान देता है, सम्मान संवाद देता है और संवाद हिंसा को पनपने नहीं देता।” उन्होंने प्रेम को मीरा-श्याम और गोपी-कृष्ण के समर्पण भाव से जोड़ते हुए कहा कि इसमें पाने से अधिक समर्पण का भाव है।
कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रीति जौहरी ने पेड़ और मानव के संवाद के माध्यम से रिश्तों की व्याख्या की, जबकि वर्तमान प्राचार्य डॉ. मंजू वाला अग्रवाल ने बदलते समय में प्रेम की वास्तविकताओं और हिंसा के खतरों से सावधान किया। अध्यक्षता कर रहीं मंच की उपाध्यक्ष प्रीति अग्रवाल ने कहा कि प्रेम शाश्वत और अनंत है, लेकिन हमें समझना होगा कि सच्चा प्रेमी कौन है।
खुले संवाद सत्र में छात्राओं ने प्रेम, व्यक्तिगत आजादी और रिश्तों पर तीखे सवाल पूछे, जिनका वक्ताओं ने सहजता से उत्तर दिया।
प्रारंभ में मंच के सचिव रवि प्रकाश भारद्वाज ने मंच की 50 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मंच समानता, मानवता, बंधुत्व और प्रगतिशील सांस्कृतिक मूल्यों के लिए समर्पित रहा है। अध्यक्ष राजकिशोर अग्रवाल ने कॉलेज प्रबंधन का आभार व्यक्त किया। संचालन डॉ. भारती सागर ने किया। व्यवस्था मुरारी लाल अग्रवाल एवं डॉ. धर्मराज ने संभाली।
इस अवसर पर अनीता अग्रवाल, आशा गोयल, मधु अग्रवाल, रामा चतुर्वेदी, सुनील आचार्य, दीपक गोयल, डॉ. आर.के. चतुर्वेदी, अरविंद टीटू, मुरारी लाल गर्ग, वीना गर्ग, छाया अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापिकाएं एवं छात्राएं उपस्थित रहीं।
