● विलुप्तीकरण के कगार पर खड़े ब्रज के लोकनाट्य भगतलीला और इसके अखाड़ों को संजीवनी मिली है- आचार्य डॉ. खेमचन्द यदुवंशी
मथुरा। सँस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, प्रयागराज द्वारा गुरुशिष्य परम्परा प्रशिक्षण योजना के अन्तर्गत ब्रज के लोकनाट्य भगतलीला के षठमासिक प्रशिक्षण शिविर का आज श्री1008 दिगम्बर जैन चौरासी केम्पस के सुरेश बाबू हॉल में वरिष्ठ रंग आचार्य डॉ. मुकेश शर्मा की अध्यक्षता में समारोह पूर्वक समापन हुआ जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार एवं गीता शोधसंस्थान व रासलीला अकादमी, वृन्दावन के कोर्डिनेटर चन्द्रप्रताप सिकरवार मंचासीन रहे। विशिष्ट अतिथि थे वरिष्ठ संगीतज्ञ अशोक कुमार नीलेश व लालदरवाजा भगत-सांगीत अखाड़ा के खलीफा ओम प्रकाश कुशवाह।
कार्यक्रम का प्रारम्भ प्रशिक्षु कलाकार गोपाल चतुर्वेदी द्वारा प्रस्तुत गणेश वन्दना- जय जय गणेश गणराज आपको प्रथम मनाते हैं से हुआ तथा कन्हैया लाल राजपूत द्वारा योगिराज भगवान श्रीकृष्ण की वन्दना प्रस्तुत कर इष्टदेवों को नमन किया।
तदोपरान्त उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज द्वारा नियुक्त प्रशिक्षक के रूप में अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ लोकनाट्यविद आचार्य डॉ. खेमचन्द यदुवंशी ने लोकनाट्य भगतलीला (भगत-सांगीत) के इतिहास व छन्द विधान पर प्रकाश डालते हुए प्रशिक्षण शिविर के बारे में बताया कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से 6 माह के अंतर्गत 8 शिष्य व शिष्याओं को इस विधा के ऐतिहासिक पक्ष की जानकारी के साथ साथ गायन,वादन,अभिनय और प्रस्तुतिकरण की बारीकियों में पारंगत किया गया है जिससे विलुप्तीकरण के कगार पर खड़े ब्रज के लोकनाट्य को संजीवनी मिली है, और अब जमकर बजेगा लोकनाट्य भगतलीला का नक्कारा।
समापन अवसर पर प्रसगिक्षणार्थी गोपाल चतुर्वेदी,कन्हैया लाल राजपूत,बाँके लाल पाण्डेय,अल्ताफ़ राजा, कन्हैया लाल पाण्डेय, कामिनी पाठक,रेखा उपाध्याय,शिखा पाठक ने भगत शैली के छंदों- दोहा, चौबोला,दौड़,लावनी, बहर-ए-तबील,लँगड़ी लावनी,कड़ा,शिकिस्त, रंगत-ए-तबील,माड़,रेख़्ता, वशीकरण,कलिंगड़ा,दुबोला,वशीकरण,खमशा आदि को विभिन्न रागों में निबद्ध कर गायन किया जिससे उपस्थित जनसमूह परम्परागत भगतलीला की प्राचीन धुनों को सुनकर झूम उठा। हारमोनियम पर सुप्रसिद्ध संगीतज्ञ राजू बाबू तथा ढोलक पर अमर नागर ने संगत प्रदान की।
समापन समारोह का संचालन आकशवाणी के उद्घोषक डॉ. दीपक गोस्वामी ने किया तथा ऋतुराज यदुवंशी ने एन सी जेड सी सी प्रयागराज व सभी का आभार व्यक्त किया।
