संस्कृति विवि में सहयोगियों के सम्मान के साथ संपन्न हुई अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

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मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में श्री अरविंद के आलोक में वेदों के अनुप्रयोगों को लेकर आयोजित हुई दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी सहयोगियों के आभार और सम्मान के साथ संपन्न हुई।
समापन समारोह में एसवीवाईएएसए यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर प्रो. रामचंद्र जी. भट, जो वेद विज्ञान शोध संस्थान के चेयरमैन भी हैं, मुख्य अतिथि थे। संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. सचिन गुप्ता ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में श्री अरबिंदो सोसाइटी, कर्नाटक के चेयरमैन डॉ. अजीत सबनीस, साक्षी ट्रस्ट, बेंगलुरु के मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. आर. वी. जहांगीरदार, साक्षी ट्रस्ट के श्री बिंदु माधव, संस्कृति यूनिवर्सिटी, मथुरा के वाइस चांसलर डॉ. एम. बी. चेट्टी भी शामिल हुए।
डॉ. रामचंद्र भट ने “वेद को कैसे समझें और वेद के सिद्धांतों को समझने और उन्हें आज की ज़िंदगी में लागू करने का नतीजा” पर रोशनी डाली। उन्होंने वेद ज्ञान पर श्री अरबिंदो के नज़रिए के बारे में भी बताया। डॉ. एम. बी. चेट्टी ने उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया और बताया कि यह कॉन्फ्रेंस वेद के हमेशा रहने वाले ज्ञान से फिर से जुड़ने और एक प्रोग्रेसिव और जागरूक समाज बनाने में इसकी ज़रूरत को समझने के हमारे साझा कमिटमेंट को दिखाती है। श्री अरविंद के नज़रिए में, वेद सिर्फ़ पुराने भजनों का कलेक्शन नहीं है—यह इंसानी विकास, अंदर की जागृति और पूरी ज़िंदगी जीने का एक गहरा रोडमैप है।
डॉ. आर. वी. जहाँगीरदार ने वेद के अलग-अलग पहलुओं पर सभी 17 स्पीकर्स की कार्यवाही का सारांश दिया। डॉ. सचिन गुप्ता ने युवाओं से वेद के सिद्धांतों को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अपनाने की अपील की और पेपर पेश करने वाले सभी जानकारों को धन्यवाद दिया और बताया कि इस कॉन्फ्रेंस से स्टूडेंट्स को बहुत फ़ायदा हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि लिविंग वेद सिर्फ़ विद्वानों का जमावड़ा नहीं है,यह श्री अरविंद के एक जैसे और विकासवादी नज़रिए से प्रेरित होकर वैदिक ज्ञान को आज के समय में ज़रूरी बनाने का एक आंदोलन है। उन्होंने बताया कि संस्कृति यूनिवर्सिटी, बृज क्षेत्र में भारतीय ज्ञान प्रणालियों और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के केंद्र के तौर पर उभर रही है, और लिविंग वेद-3 की मेज़बानी पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने के अपने वादे को और मज़बूत करती है। यूनिवर्सिटी विद्वानों, अभ्यास करने वालों, छात्रों और आध्यात्मिक साधकों को मिलकर काम करने के लिए एक मंच देती है। श्री अरबिंदो सोसाइटी के साथ साझेदारी करने से गहराई, विशेषज्ञता और सच्चाई मिलती है।
डॉ. अजीत सबनीस ने बताया कि वह श्री अरबिंदो के विचारों और दर्शन से कैसे प्रभावित हुए और उन्होंने कहा कि युवा दिमागों को यह सीखने से फ़ायदा होगा कि वैदिक ज्ञान कैसे फ़ैसले लेने, साफ़गोई, सेहत, क्रिएटिविटी और चरित्र को बेहतर बना सकता है। उन्होंने इस कॉन्फ्रेंस को आयोजित करने के लिए सभी आयोजकों यानी संस्कृति यूनिवर्सिटी, साक्षी ट्रस्ट, सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी, दिल्ली और श्री अरबिंदो सोसाइटी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कॉन्फ्रेंस के लिए शानदार इंतज़ाम करने के लिए संस्कृति यूनिवर्सिटी के चांसलर और वाइस चांसलर को भी धन्यवाद दिया।
इस मौके पर कार्यक्रम उच्च स्तरीय पैमानों खरा उतारने के लिए विशेष प्रयास करने वाले सहयोगी, विवेक श्रीवास्तव, विजय सक्सेना, दिलीप सिंह, डॉ रेणु गुप्ता, ज्योति यादव, जय शंकर पांडे, राहुल, सुधांशु शाह आदि को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।

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