एक बार फिर केएम अस्पताल के सर्जरी चिकित्सकों ने किया दुर्लभ ऑपरेशन, महिला के पेट से निकाला बालों का गुच्छा

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केएम हॉस्पिटल में यह पांचवा ऐसा मामला है, दुर्लभ सर्जरी करके डाक्टरों ने बचाई मरीज की जान

मथुरा। केएम अस्पताल के सर्जरी विभाग चिकित्सकों ने दुर्बल सर्जरी करके एक महिला के पेट से करीबन दो किलो बालों का गुच्छा निकाला है, मरीज अब स्वस्थ्य है, मरीज पिछले दस सालों से ट्राइकोफैगिया नाम की मानसिक बीमारी से जूझ रही थी, जिसमें व्यक्ति अपने ही बाल खाता है। चिकित्सा विज्ञान में इसे ट्राइकोबेज़ोआर कहा जाता है और दुनियाभर में अब तक ऐसे महज करीब 500 मामले ही दर्ज किए गए हैं। एक लाख लोगों में से एक व्यक्ति इस बीमारी से ग्रस्त होता है।
गौरतलब हो कि 35 वर्षीय रानी के दस पूर्व पिता की मृत्यु होने पर वह मानसिक रूप से कमजोर हो गई थी, और ट्राइकोफैगिया नाम की मानसिक बीमारी से ग्रस्त हो गई। वह अपने ही बालों को नौंच नौंच कर खाने लगी। 10 महीनों से रानी के पेट में दर्द, उल्टी जैसी शिकायत होने लगी। कई जगह इलाज कराने के बाद भी मरीज को फायदा नहीं हुआ। मरीज के परिजन सरदार सिंह उसे लेकर केएम अस्पताल पहुंचे यहां सर्जरी विभाग के असिटेंट प्रोफेसर सागर मित्तल ने ऑपरेशन की सलाह परिजनों को दी। स्वीकृति मिलने के बाद सर्जरी विभागाध्यक्ष डा. अजय अग्रवाल के निर्देशन में प्रोफेसर डा. यशपाल जिंदल, प्रो. अजय जैन, प्रो. डा. संकल्प श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में असिटेंट प्रोफेसर डा. सागर व उनकी टीम के डा. आशुतोष, डा. तन्मय डा. निधि, डा. चिंतन के अलावा निश्चेतना विशेषज्ञ डा. अंचल जैन, डा. सुरभि, डा. शिल्पा, ओटी इंचार्ज शिवकुमार, भूपेन्द्र ने सफल सर्जरी कर मरीज के पेट में से बालों का दो फुट का गुच्छा बाहर निकाल दिया। मरीज के स्वस्थ होने में नर्सिंग विभाग के घनश्याम और रंजीत का विशेष सहयोग रहा।
सर्जरी विभागाध्यक्ष डा. अजय अग्रवाल ने बताया कि महिला लंबे समय से पेट दर्द और भूख न लगने की शिकायत, उलटी से जूझ रही थी. उसने कई जगह इलाज कराया, लेकिन आराम नहीं मिला। इसके बाद वह केएम हॉस्पिटल पहुंची, जहां अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन व अन्य जांच की प्रक्रिया शुरू की गई। एंडोस्कोपी के दौरान डॉक्टरों को महिला के पेट में बालों का बड़ा गुच्छा जमा होने का पता चला। स्थिति गंभीर थी और दवा से इलाज संभव नहीं था, इसके बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने सफल सर्जरी कर महिला के पेट से बालों का पूरा गुच्छा बाहर निकाला। ऑपरेशन के बाद महिला की हालत स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो गई है। मेडीकल सुप्रीटेंट डा. अभय सूद, एडी ने बताया कि इस तरह की समस्या अक्सर बाल खाने की आदत (ट्राइकोफेजिया) या मानसिक कारणों से जुड़ी होती है, जिसमें व्यक्ति अनजाने में बाल निगलता रहता है। समय के साथ ये बाल पेट में जमा होकर बड़ी गांठ का रूप ले लेते हैं, जिससे पाचन तंत्र प्रभावित होता है।
केएम हॉस्पिटल के लिए यह पांचवा ऐसा मामला है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह बीमारी बेहद दुर्लभ मानी जाती है। इस सफल सर्जरी के बाद न सिर्फ मरीज और उसके परिजनों ने राहत की सांस ली, बल्कि चिकित्सा जगत में भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। केएम विश्वविद्यालय के कुलाधिपति किशन चौधरी, कुलपति डा. एनसी प्रजापति ने सर्जरी विभाग की चिकित्सकीय टीम को सफल ऑपरेशन की बधाई देते हुए ब्रजवासियों सहित अन्य लोगों से अपील की है कि अगर लंबे समय से पेट दर्द, भूख न लगना, उल्टी होना या पाचन से जुड़ी कोई समस्या बनी हुई है, तो समय पर जांच जरूर कराएं, ताकि ऐसी गंभीर स्थितियों से बचा जा सके।

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