● लोक एवं जनजातिय संस्कृति संस्थान (संस्कृति विभाग) लखनऊ द्वारा हाथरस में दूसरी बार आयोजित दस दिवसीय सृजन प्रशिक्षण-शिविर का भव्यता पूर्वक आगाज़।
● लक्ष्मी नगर स्थित सेन्ट आर. एच. कॉन्वेन्ट स्कूल में 4 से 14 जून तक बच्चे विधिवत सीखेंगे हाथरसी पारम्परिक संस्कार गीत।
● 7500437706 पर आधार कार्ड भेज कर तुरन्त पंजीकृत कराएं अपने बच्चों को।

हाथरस। सदियों से विवाह शादियों में महिलाओं द्वारा जो मंगलगीत गाये जाते थे वह अब आधुनिक जीवनशैली के कारण शहरों में पूर्णतः विलुप्त हो चुके हैं तथा गांवों में भी नाममात्र को शेष रह गए हैं। वास्तविकता यह है कि नवोनिमेश व विकास के नाम पर हम अपनी लोक संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं और इसी कारण विवाहों में वातावरण दूषित होता जा रहा है,इससे बचने के लिए हमें अपने बच्चों को संस्कारवान बनाना होगा। संस्कृति विभाग द्वारा हाथरस में लोक संस्कृति के पुनरोत्थान हेतु यह प्रशिक्षण शिविर सरकार का इस जनपद के लिए सर्वोत्तम उपहार है और इसमें प्रशिक्षित हाथरस के बच्चों की स्वरलहरी अब पूरे देश को गुंजायमान कर देगी।”
उक्त वक्तव्य अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ लोकनाट्यविद व साहित्यकार आचार्य डॉ. खेमचन्द यदुवंशी ने उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजातिय संस्कृति संस्थान, (सँस्कृति विभाग) लखनऊ द्वारा आयोजित सृजन प्रशिक्षण शिविर-2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में देकर उपस्थित जन समूह से अपने 8 से 18 वर्ष के बच्चों को इसमें सहभागिता कराके लाभ लेने हेतु प्रेरित किया।
इससे पूर्व अध्यक्षता कर रहे पं. राहुल गौड़, सन्स्थान के संरक्षक राष्ट्रीय आशुकवि पं. अनिल बोहरे, विशिष्ट अतिथि समाज सेविका बाला शर्मा (पूर्व सभासद), शिक्षाविद पं. मदन लाल शर्मा (नदबई राजस्थान), डॉ. जितेंद्र शर्मा (सचिव काका हाथरसी स्मारक), सुकवि व शिक्षाविद चेतन उपाध्याय, शिक्षाविद अवनीश कुमार, संगीतज्ञ उमा ज्योति आदि अतिथियों ने माँ सरस्वती की छवि के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन किया।
संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा नियुक्त प्रशिक्षिका एवं स्व. पं. नथाराम गौड़ की प्रपौत्रवधू ज्योति गौड़ ने प्रशिक्षण के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए चयनित सभी बच्चों का परिचय कराया व विलुप्त हो रहे पारम्परिक विवाह गीतों की बानगी प्रस्तुत की।
इसीक्रम में संयोजक व प्राचार्या प्रमिला गौड़ ने प्रशिक्षण की उपयोगिता के बारे बताते हुए सभी से मोबाइल 7500437706 पर सम्पर्क कर तुरन्त अपने बच्चों को इस प्रशिक्षण शिविर में पंजिकृत कराने की अपील की जिससे वह 4 से 14 जून तक विधिवत प्रशिक्षण लेते हुए संस्कारित हो इसका लाभ ले सकें।
अध्यक्षीय उद्बोधन में पं. राहुल गौड़ ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा विलुप्त होती सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिये यह प्रशिक्षण मील का पत्थर साबित होगा और विवाह उत्सवों में पुनः पारम्परिक गीतों का प्रचलन बढ़ेगा।
इस अवसर पर चयनित प्रतिभागियों के साथ साथ बाँके बिहारी, सत्य प्रकाश, मोहित कुमार,पायल गौड़,पुनीत उपाध्याय,प्रद्युम्न यादव, नंदिनी गौड़, मोहित गौड़, ऋतुराज यदुवंशी, अशोक कुमार नीलेश,भव्या शर्मा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन राष्ट्रीय आशुकवि अनिल बोहरे ने किया तथा विद्यालय के डायरेक्टर एडवोकेट अजय किशोर गौड़ ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
