10 जनवरी को दस कवियों ने बनाया खास

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मथुरा रिफाइनरी ने काव्य रस में डूबकर मनाया विश्व हिन्दी दिवस

मथुरा । दस जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर मथुरा रिफाइनरी ने दूरदर्शन केंद्र और आकाशवाणी केंद्र मथुरा के संयुक्त तत्वाधन में कवि सम्मेलन का आयोजन किया और काव्य रसों में डूबकर इस विशेष दिन को मनाया।  मुकुल अग्रवाल, कार्यकारी निदेशक व रिफाइनरी प्रमुख, मथुरा रिफाइनरी एवं अध्यक्ष, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, मथुरा की अध्यक्षता में कवि सम्‍मेलन की शुरुआत की गई। दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की पारंपरिक शुरुआत हुई और मुकुल एवं श्रीमति छवि अग्रवाल ने कवियत्री एवं कवियों का शॉल ओढ़ाकर स्‍वागत किया। कवि सम्मेलन में सुरेन्द्र सार्थक, (ओज, व्यंग्य रस एवं कवि सम्मेलन संचालन), श्याम सुन्दर शर्मा, ‘अकिंचन’, (श्रंगार भक्ति रस), डॉ रमाशंकर पाण्डे, (ओज रस), श्रीमती रेनू उपाध्याय, (श्रृंगार, आध्यात्म, हास्य रस), श्रीमती पूनम शर्मा ‘पूर्णिमा’, (भवित रस), डॉ नरेन्द्र शर्मा, ‘ नरेन्द्र”, (गीतकार), डॉ. उमाशंकर राही, (ओज रस), अंजीव ‘अंजुम’, (सजल कविता), डॉ सोहन लाल ‘शीतल’, (राजभाषा), डॉ भगवान ‘मकरंद’, (हास्य रस) आमंत्रित थे। साथ ही दूरदर्शन- आकाशवाणी केंद्र मथुरा से वेद प्रकाश, सत्यब्रत सिंह, ओ पी सिंह और उनकी टीम भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए और कार्यक्रम के आयोजन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई |
ओज, व्यंग्य रस के कवि सुरेन्द्र सार्थक ने सम्मेलन का आगाज़ करते हुए श्रोताओं को अपने ओजस्वी स्वर से उद्वेलित कर दिया। कवियत्री सुश्री श्रीमती रेनू उपाध्याय अपनी कोमल व प्‍यार श्रृंगार, आध्यात्म, हास्य रस प्रस्‍तुत कर पूरे सभागार में श्रृंगार रस की गंगा प्रवाहित की। डॉ भगवान, ‘मकरंद’, ने समाज में व्‍याप्‍त विरूपताओं एवं अव्‍यवस्‍थाओं पर हास्‍य व्‍यंग्‍य की तीखी कविताऍं सुनाकर श्रोताओं को ताली बजाने के लिए मजबूर कर दिया। पूरा सदन हास्‍य रस के हिंडोले में बैठकर ठहाके लगाता रहा। डॉ नरेन्द्र शर्मा, ‘ नरेन्द्र”, ने पारिवारिक संबंधों पर मधुरम प्रहार कर गीत सुनाए जिनको सुनकर श्रोतागणों की आंखें नम हो गई। बृज क्षेत्र के जाने माने कवि एवं गीतकार श्याम सुन्दर शर्मा, ‘अकिंचन’ ने हिंदी की महत्‍ता और पारिवारिक रिश्तों पर शब्दों की गंगा प्रवाहित की, डॉ रमा शंकर पांडे और डॉ. सोहन लाल शीतल ने अपने विशिष्ट अंदाज़ में ज्वलंत मुद्दों पर अपनी रचनाओं से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया| अंजीव ‘अंजुम’ की रचना “भिखारिन का चित्र”- ने समाज की कुरीतियों और अमानवीय व्यवहार पर तंज़ कसा, भवित रस की मंदाकिनी प्रवाहित करते हुए श्रीमती पूनम शर्मा ‘पूर्णिमा’ ने श्रोताओं को गीतमय कर कंठप्रिय संगीत के दर्शन करवाए। मंच संचालक सुरेन्द्र सार्थक ने अपनी हास्‍य- व्यंग्य रचनाओं से पूरे हाल के श्रोताओं को तालियॉं बजाने के लिए बेबस कर दिया और पूरा सदन तालीमय हो गया। कवि सम्‍मेलन अर्धरात्रि तक समा बांधे श्रोताओं को गुदगुदाता रहा। पूरा सदन श्रोताओं से भरा हुआ था। श्रीमति रेनू पाठक, वरिष्‍ठ प्रबंधक (सी.सी. एवं हिन्दी) के संचालन एवं दीप चंद वर्मा, महाप्रबंधक (कर्मचारी सेवाएं, प्रबंधन सेवाएं, शिक्षण एवं विकास) के स्वागत भाषण, धन्यवाद ज्ञापन एवं कविताओं ने कवि सम्‍मेलन में चार चाँद लगा दिये।

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